पृष्ठ:मानसरोवर भाग 6.djvu/२४७

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२७० मानसरोवर को जो सना चाहे, दें, मुझे कोई आपत्ति न होगी । मैं उन्हें पाता, तो स्वय बादशाह की खिदमत में भेज देता , लेकिन पाँचों महानुभावो में से एक का भी पता न चला । शायद वे सब-के-सब रातोंरात कलकत्ते भाग गये थे। इतिहास में उक्त घटना का कहीं उल्लेख नहीं किया गया , लेकिन किंवदन्तियाँ, जो इतिहास से अधिक विश्वसनीय है, उसकी सत्यता की साक्षी हैं।