पृष्ठ:मेघदूत का हिन्दी-गद्य में भावार्थ-बोधक अनुवाद.djvu/२६

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मेघदूत।


बगलियो को गिन गिन कर उन्हें अपनी सहचरी सखियों को दिखावेंगे। यदि तू कभी ज़ोर से गरज देगा तो सिद्धों की सहचरिया डर कर कांप उठेगी और सहसा अपने प्रेमियों के कण्ठों से लिपट जायेंगी। यह आलिङ्गन तेरी ही बदौलत प्राप्त हुआ जान, सिद्ध लोग तेरा बहुत उपकार मानेंगे।

यद्यपि मुझे विश्वास है कि मेरा सन्देश मेरी प्रियतमा तक पहुँचाने के लिए तू बहुत जल्द चलने की चेष्टा करेगा, तथापि, मुझे डर है कि कहीं पहाड़ों पर अर्जुन नाम के वृक्षों के फूलों की सुगन्धि तुझे मोह न ले और कहीं नू सुगन्धि के लोभ से बहुत देर तक न ठहर जाय। तेरे मार्ग में पहाड़ भी एक दो नहीं, कितने ही हैं और उन सब पर अर्जुन के पेड़ हैं। फिर, एक बात और भी है। शुक्ल और सजल नेत्र-प्रान्तवाले मोर भी अपनी केकाओं के द्वारा तेरा स्वागत करेंगे। उनके स्वागत का स्वीकार करने के लिए यदि तू यह निश्चय करे कि यहाँ भी कुछ देर ठहर जाना चाहिए तो आश्चर्य नहीं। इन रुकावटों के कारण जल्द जाने में तू कैसे समर्थ होगा, यह मेरी समझ में नहीं आता। इसी से मेरे मन में यह सन्देह होता है कि कहीं तू इन जगहों में देर तक न रूका रहे।

आगे तुझे दशार्ण नामक देश मिलेगा। तेरे पहुँचने पर भी वहाँ हंस कुछ समय तक ठहरे रहेंगे। बात यह है कि वह देश पहाड़ी है। इस कारण वहाँ के जलाशयों का जल वर्षा में भी गँदला नहीं होता। दशार्थ में केतकी बहुत होती है। उसके बड़े बड़े सुन्दर फूलों से वहाँ के उपवनों के किनारे तुझे पीले पीले दिखाई देंगे। यह समय पक्षियों के लिए घोंसले बनाकर उनके भीतर रहने का