पृष्ठ:मेघदूत का हिन्दी-गद्य में भावार्थ-बोधक अनुवाद.djvu/२५

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मेघदूत।


सुगन्धि-पूर्ण और धीरे धीरे बहनेवाला जल तू अवश्य पी लेना। चित्रकूट में बरसने के कारण तेरे पास जल का सञ्चय रह भी छोड़ा हो जायगा। एक और भी कारण से नर्मदा में जल-ग्रहण करना तेरे लिए आवश्यक होगा। वह यह कि जलयुक्त होने से तू भारी हो जायगा। अतएव, तुझ पर वायु का कुछ भी ज़ोर न चलेगा। वह तुझे मनमानी दिशा में न ले जा सकेगा। मुझे विश्वास है, यह बात तू भी जानता होगा कि पूर्णता गौरव की सूचक है और रिक्तता लाघव की खाली चीज़ सदा ही हलकी होती है और मरी सदा ही भारी।

जहाँ जहा तू जल बरसावेगा वहाँ वहाँ कदम्ब के पेड खिल उठेंगे। हरे, पीले फूलों से वे लद जायँगे। उन फूलों के बीच में ऊपर का उठे हर कंसर ( रुवे ) बहुत ही भले मालूम होंगे। इन कुमुमित कदम्बों, और नदियों के कहारों में नई कलियाई हुई कन्दलियों, को देख कर मोरो के आनन्द की सीमा न रहेगी। जले हुए जङ्गलों में भूमि पर तेरा बरसाया हुआ जल पड़ने से जो सुन्दर सुगन्धि उड़ेगी उसे सूँघ कर भी वे बहुत प्रसन्न होंगी। अतएव, ऐसी आनन्ददायक सामग्री प्रस्तुत करने के लिए वे तेरे बहुत ही कृतज्ञ होगे और तेरे आगे उड़ उड़कर प्रसन्नतापूर्वक तुझे मार्ग बतावेंगे। इस कारण तुझे किसी से अलका का मार्ग पूँछना भी न पड़ेगा। तुझस केवल मोरों ही को आनन्द की प्राति न होगी। तू सिद्धों के भी आनन्द का कारण होगा। जब तू बरसने लगेगा तब चातक दौड़ दौड़ कर अपनी चोंचों से तेरे वारि-बिन्दु ग्रहण करेंगे और बगलिया पाँत बाँध कर आकाश में खुशी खुशी उड़ने लगेंगी। उस समय सिद्ध लोग चातकों को देख देख कर प्रमन्न होगें और उड़ती हुई