पृष्ठ:मेघदूत का हिन्दी-गद्य में भावार्थ-बोधक अनुवाद.djvu/२८

विकिस्रोत से
नेविगेशन पर जाएँ खोज पर जाएँ
यह पृष्ठ प्रमाणित है।
१४
मेघदूत।


हो सींच देना। भूलना मत। वहाँ तू एक और भी काम करना। उन फूलबागों में मालिने फूल तोड़ती होंगी। उनके कपोलों से गरम गरम पसीना निकल रहा होगा। उसने कानों पर रक्खे हुए फल के गहने की कान्ति बिगाड़ दी होगी; वह पुष्पाभरण कुम्हला गया होगा। बेचारी मालिनें तङ्ग आकर बार बार पसीना पोंछती होगी। अतएव, दया करके ज़रा देर उनके ऊपर छाया कर देना और उनसे जान-पहचान भी कर लेना।

जाना तुझे है उत्तर दिशा को, क्योंकि अलका उसी तरफ है, और उज्जयिनी है कुछ पश्चिम में। इस कारण उस तरफ़ से जाने में तुझे फेर अवश्य पड़ेगा। परन्तु फेर पड़े तो पड़े; उज्जयिनी को जाना अवश्य पड़ेगा। वहाँ के ऊँचे ऊँचे अभ्रंकष महलों को देखे बिना न रहना। वहाँ की कामिनियाँ बहुत ही रूपवती हैं। उनकी चञ्चल चितवन बड़ा काट करती है। जिस समय तू बिजली चमकावेगा उस समय उसकी चमक से उसकी आँखें चौंधिया जायँगी। अतएव, उनकी शोभा और भी अधिक हो जायगी। यदि तू उन विलासवती वनिताओं के कटाक्षों का निशाना न बना तो मैं यही समझूँगा कि तेरा जन्मही व्यर्थ गया।

मार्ग में निर्विन्ध्या नाम की नदी बड़े प्रेम से तेरास्वागत करेगी। तीर पर बैठे हुए हंसों की पंक्ति को वह तागड़ी के समान दिखावेगी और लहरों की हिलोरें लगने पर हंस जो मधुर शब्द करेंगे उसे वह तागड़ो के घुघुरुओं की झनकार के समान सुनावेगी। तू देखेगा कि वह बल खाती हुई कैसी अनोखी चाल से जा रही है और भँवर- रूपी नाभि को किस अपूर्व कौशल मे दिखा रहा है बात यह है कि