पृष्ठ:मेघदूत का हिन्दी-गद्य में भावार्थ-बोधक अनुवाद.djvu/५०

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मेघदूत ।'


मित्र मोर आकर जब सायङ्काल बैठता है तब मरी हृदयेश्वरी कङ्कण बजते हुए अपने कोमल कर से ताल दे देकर उसे नचाती है ।

मेरे बताये हुए इन चिह्नों का तू अच्छी तरह याद रखना। इन्हें देख कर तू मेरा घर महज ही पहचान लेगा; किसी से पूछने की ज़रूरत न पड़ेगी । हाँ, एक चिप और भी मैं वताता है। मेरे द्वार पर शङ्ख और पदा के चित्र हैं। उनसे भी तुझे मेरा घर पहचानने से सहायता मिलेगी। हाय हाय! बिना मेरे मरा घर, इस समय. बिलकुल ही शोभाहीन होगा । सूर्य के वियोग से जो दशा वारिज- वन की होती है मेरे वियोग से वही दशा मर घर की भी हुई होगी। कमल ही के सदृश वह भी मलिन और छविहीन होगया होगा।

मेरे घर पर पहुँच कर मेरी प्रियतमा के प्राणों का परिताण करने के लिए तू एक काम करना । बड़ा भारी रूप धर कर तू उमर्क सामने न जाना, क्योंकि वैसा रूप देखने से शायद वह डर जाय, अतएव, तू हाथी के बच्चे के सदृश छोटा सा रूप धारण कर लेना और मेरे क्रीड़ा-शैल के ऊपर उसी शिखर पर चुपचाप जा बैठना जिसका उल्लेख मैं पहले ही कर चुका हूँ। फिर, अपनी बिजलीमापिणी दृष्टि को मेरे घर के भीतर जाने देना । परन्तु उसे बहुत न चमकाना । जुगुन की पॉति के सदृश उसे थोड़ा थोड़ा चमका कर देखना कि मेरी प्राणवल्लभा क्या कर रही हैं। मैं उसकी भी पहचान बताये देता हूँ। वह कृशाङ्की है; उम्र उसकी सोलह वर्ष से अधिक नहीं; दाँत उसके अनार केसे दाने हैं; ओठ उमदे पके हुए बिम्ब-फल के सदृश हैं; कटि उसकी अत्यन्त क्षीण