पृष्ठ:मेघदूत का हिन्दी-गद्य में भावार्थ-बोधक अनुवाद.djvu/६३

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मेघदूत ।


मेरी अङ्गिनी पर वियोग की यह पहली ही व्यथा पड़ी है। मी में वह बड़ी ही उन झोकाग्नि संपन्न होगी मेरा सन्देस सुना कर उन दुखिया का दुःग्य कम कर देना-उमे धीरज देना । फिर. जिम कैलास-पर्वन के शिवगं का शिवजी का वाहन खेल अपन सीगो से वादा करता है उससे उतर पड़ना : मंः सन्देश सुनाकर जिम नरह तु मंग पत्रा के प्राणों की रक्षा करेगा उनी नरह उनका सन्देश तथा उसका कोई चिद लाकर में भी प्राग की रक्षा करना भूलना मत लौट कर भरे पान अवश्य अाना! कुन्द के कुम्हलाये हुए प्रात:कालीन कुसुम के मदृश में जीबित की रजा तेरे ही हाथ है।

मुझे अपना सखा समझ कर मना न नही व्यथित विधागा समझ कर, अधयाना मी न मही दीन-दुखिया और दया-पात्र समझ कर, मेरा इतना काम कृपा करकं अवश्य कर दना । यह मित्रों ही के करने योग्य है ! मेरी इस विनीत प्रार्थना को मफत कर चुकने पर वर्पा-ऋनु-सम्बन्धिनी शामा में संयुक्त होकर जहां-- जिम देश, जिम प्रान्त में-मेरा जो चाहे वहां आनन्द में विचरण करना : जिस तरह मुझे अपनी प्रियतमा पत्नी के वियोग का दुःख उठाना पड़ा है उस तरह. भगवान करे, तुझे तेरी प्यारी विजली के वियोग का दु:ख कभी, पल भर के लिए भी, न उठाना पड़े


इति ।