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रहीम-कवितावली।
परकीया-प्रवत्स्यत्प्रेयसी—
मितवा चलेउ बिदेसवा, मन अनुरागि।
गणिका-प्रवत्स्यत्प्रेयसी—
पीतम एक सुमिरिनिआ[१], मोंहि दै जाहु।
१०—आगतपतिका।
मुग्धा-आगतपतिका—
बहुत दिना पर पिअवा, आयउ आजु।
मध्या-आगतपतिका—
पिअवा पौरि दुअरवा, उठि किन देखु।
प्रौढ़ा-आगतपतिका—
योबन प्रान पिअरवा, हेरेउ आइ।
परकीया-आगतपतिका—
पूछत चली खबरिया, मितवा[३] तीर।
गणिका-आगतपतिका—
तौं लगि मिटै न मितवा, तनकी पीर।