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पृष्ठ:रहीम-कवितावली.djvu/९९

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रहीम-कवितावली।

 

परकीया-प्रवत्स्यत्प्रेयसी—

मितवा चलेउ बिदेसवा, मन अनुरागि।

पिअ की सुरति गगरिया, रहि मग लागि॥८५॥

गणिका-प्रवत्स्यत्प्रेयसी—

पीतम एक सुमिरिनिआ[], मोंहि दै जाहु।

जेहिं जपि तोर बिरहवा[], करब निबाहु॥८६॥

१०—आगतपतिका।


मुग्धा-आगतपतिका—

बहुत दिना पर पिअवा, आयउ आजु।

पुलकित नवल बधुइआ, कर घर-काजु॥८७॥

मध्या-आगतपतिका—

पिअवा पौरि दुअरवा, उठि किन देखु।

दुरलभ पाइ बिदेसिआ, जिअकै लैखु॥८८॥

प्रौढ़ा-आगतपतिका—

योबन प्रान पिअरवा, हेरेउ आइ।

तलफत मीन तिरिअवा, जस जल पाइ॥८९॥

परकीया-आगतपतिका—

पूछत चली खबरिया, मितवा[] तीर।

नैहर खोज तिरिअवा, पहिरि सुचीर॥९०॥

गणिका-आगतपतिका—

तौं लगि मिटै न मितवा, तनकी पीर।

जौं लगि पहिरि न छतिआ, नख-नग-चीर॥९१॥

  1. सुमिरिनी-माला,
  2. बिरह।
  3. पीतम।