पृष्ठ:राबिन्सन-क्रूसो.djvu/११८

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द्वीप का पुनर्दर्शन। १०९ । 1 पतली डालें काट कर कोशिश की तो मालूम हुआ कि टोकरी | बढ़िया बन सकती है । उसके दूसरे दिन कुल्हाड़ी लेकर गया और एक बोझ डालें काट कैर सूखने के लिए घेरे के भीतर रख दीं । जब वे डालें मुरझा कर काम लायक हो गईं तब उन्हें अपने घर पर ले गया । मैंने देश में अपने घर में टोकरी बनाने वालों को टोकरी बुनते देखा था और कुछ कुछ सीखा भी था । इस समय वह विद्या काम आ गई । मैंने छोटे बड़े कितने ही टोकरे बना डाले । यद्यपि वे खूबसूरत नहीं बने तथापि घर के काम चलाने लायक तो हो गये । अपनी फसल रखने के लिए कितने ही टोकरों को खूब गहरा बनाया। मैं गरमी के दिन में बैठ कर अधिकतर टोकरी ही बुनता रहा। अब भी दो तीन प्रधान वस्तुओं की कमी बनी रही । एक तो कुछ बोतलों के सिवा पतली चीज़ रखने को कोई बर्तन में था और न कोई रसोई बनाने ही का पात्र था । दूसरे तम्बाकू पीने का नल भी न था । ोप का पुनर्दर्शन मैं पहले कह आया हूं कि समस्त द्वीप देखने की मेरी इच्छा थी । मेरे कुजभवन के पास ही समुद्र था। मैं उसी और समुद्र के किनारे किनारे घूमने की इच्छा से बन्दूक, कुल्हाड़ी, कुत्ते, यथेष्ट गोली-बारूददो डिब्बे बिस्कुट एक बड़ो थैली में सूखे अंगूर लेकर रवाना हुआ। समुद्रतट पर जाकर पहले पश्चिम ओर की स्थल भूमि देखी। किन्तु कुछ निश्चय नहीं कर सका कि वह किस द्वीप या महादेश,