पृष्ठ:राबिन्सन-क्रूसो.djvu/११९

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राबिन्सन क्रूसो ।

१०२ राबिन्सन क्रसो । ( है का किनारा है । अनुमान किया, वह किनारा पन्द्रहबीस मील से दूर न होगा। मैंने यही मान लिया कि यह अमेरिका ही का कोई अंश होगा और वहाँ असभ्य लोग रहते होंगे। आहा ! यदि मैं वहाँ किसी तरह पहुँच सकता ते विधाता का सदय विधान जान कर हृदय से कृतज्ञ होता । फिर मैंने यहां सोचा कि यदि वह स्पेन का राज्य होगा तो एक न एक दिन कोई जहाज़ इस रास्ते से जाते आते ज़रूर दिखाई देगा । यदि ऐसा न होगा तेा निश्चय कर लेंगा कि यह असभ्य लोगों का मुल्क है और वे असभ्य कुछ ऐसे वैसे न होंगेये ज़रूर नरवादक राक्षस होंगे । इन बातों को सेचतेविचारने में धीरे धीरे आगे बढ़ा। मैंने जिस ओर अपने रहने के लिए घर बनाया था उस ओर से इस तरफ का समुद्रतट अधिक रमणीय मालूम होने लगा। खूब लम्बा-चौड़ा मैदान हरियाली, भाँति भाँति के फूल और तरु-लताओं से शोभायमान था। झुण्ड के झुण्ड हरे रंग के सुग्गे इधर से उधर आकाश को सब्ज़ करते हुए उड़े क्या जा रहे थे मानो आकाश में कमल घास के खेत बहे जाते हों। यदि मैं एक सुग्गे को पकड़ सकता तो उसे पालता और पढ़ना सिखाता। बड़ी युक्ति से मैंने एक दिन एक तोते के बच्चे को लाठी की झपट मार कर नीचे गिराया । उसे पकड़ कर मैं घर पर लाया और यहपूर्वक पढ़ाने लगा। किन्तु बहुत दिनों बाद उसका कण्ठ खुज्ञा। आख़िर उसने बोलना सीखा । वह बड़ी कोमलता से मेरा नाम लेकर मुझे पुकारने लगा। इस प्रकार भ्रमण करने से मेरा चित्त बहुत प्रसन्न हो गया था। निम्न भूमि में कहीं कहीं खरगोश और श्टगाल के