पृष्ठ:राबिन्सन-क्रूसो.djvu/१२६

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फसल । १०8 कर डाला है । किन्तु अब भी कुछ समय था। क्योंकि सब धान पके नहीं थे। जिस तरह होगा बचे हुए धान की रक्षा करनी ही होगी, नहीं तो ये सस्यघातक पक्षी धान को निशेष कर के मुझे अन्न के बिना मार ही डालेंगे। में खेत से कुछ ही दूर गया हूँगा कि वे सब पक्षी साकांक्ष दृष्टि से देखने लगे कि मैं गया कि नहीं । मेरे ज़रा आंख के ओोट होते ही वे झुंड के झुंड पेड़ से उतर कर फिर खेत में गिरने लगे । मैं, सब के उतर आने तक ठहर न सका। मुझे अत्यन्त क्रोध चढ़ आया । बड़ी तेज़ी से घेरे के पास जाकर मैंने उन चिड़ियों पर गोली चला दी। उनमें तीन पक्षी मरे और कुछ घायल हुए । मैंने उन तीनों को डोरी में बाँध कर खेत के तीन तरफ़ लटका दिया । इससे आशातीय उप कार हुआ। उन पक्षियों ने खेत में आना तो छेड़ा ही, साथ ही इसके जितने दिन वे तीनों मृत पक्षी टंगे रहे उतने दिन उन्होंने उस तरफ़ आने का नाम तक नहीं लिया । दिसम्बर के अख़ीर में फसल अच्छी तरह पक गई । काटने का समय आ पहुँचा किन्तु उसे काटें कैसे १ एक ए की आवश्यकता थी । जहाज़ से जो जंग लगी हुई तलवार लाया था, उसके केंचुए की तरह टेढ़ा कर लिया। मेरा खेत ही कितना था और काटने वाला भी मैं अकेला ही था। किसी तरह उसी निजरचित हंसुए से काम निकल गया। धान की बातें काट कर टोकरे में भर्ती । पेड़ों के खेत में - ही छोड़ दिया, लेकर क्या करता । धान की बाल घर पर ले आया और लाठी से पीट कर उनके दाने छुड़ा लिये । मेरे आनन्द और उत्साह की सीमा न रही । ईश्वर की कृपा होगी तो समय पाकर अब मेरे आहार का अभाव मिट