पृष्ठ:राबिन्सन-क्रूसो.djvu/१३

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राबिन्सन क्रूसो ।


अपने साथी का उत्साहवाक्य सुनकर और समुद्र की मनेहरता देख कर मैं पूर्व दिन की सब प्रतिज्ञायें और संकल्प धीरे धीरे भूलने लगा । बीच बीच में सुविद्धि का उदय होता भी था तो उसे मैं मानसिक दुर्बलता कह कर मन से दूर कर देने लगा । पाँच छः दिन में जब में समुद्र के स्वभाव से कुछ कुछ परिचित हो गया तब फिर उन सुविचारों का हृदय पर असर न होने दिया । किन्तु इस औद्धत्य के कारण विधाता ने मेरे भाग्य में अनेक तिरस्कार और लञ्छनाओं की व्यवस्था पहले ही ठीक कर रक्खी थी।

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क्रूसा के भाग्य में भयङ्कर तूफान

समुद्र-यात्रा के छठे दिन हम लोगों का जहाज़ यारमाउथ बन्दर में आ लगा । आँधी आने के पीछे आज तक हवा प्रतिकूल और समुद्र स्थिर था, इसलिए हम लोग बहुत ही थोड़ी दूर आगे बढ़ सके । हम लोगों ने बाध्य होकर यहाँ लङ्गर डाला । सात आठ दिन तक वायु प्रतिकूल चलती रही, इस कारण हम लोग वहाँ से हिलडुल न सके । इसी बीच न्यूकैसिल से बहुत से जहाज़ इस बन्दर में आकर अनुकूल वायु की प्रतीक्षा करने लगे ।

हम लोग इतने दिन इस बन्दर में बैठे न रहते, नदी के प्रवाह की विपरीत दिशा में चले जाते; किन्तु हवा का वेग बढ़ते बढ़ते चार पाँच दिन के बाद बहुत प्रबल हो उठा । परन्तु नदी के मुहाने को बन्दर की ही भाँति निरापद जान कर और हम लोगों के जहाज़ की रस्सी को बहुत मजबूत समझ कर माँझी लोग निश्चिन्त और निःशङ्कभाव से समुद्र