पृष्ठ:राबिन्सन-क्रूसो.djvu/१३१

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राबिन्सन क्रूसो ।

११४ राबिन्सन क्रसे। जो बर्तन गला जाता था वह ऐसा चिकना गया था जैसे हो । उस पर आप ही पालिश होगई हो । रसोई बनाने के उपयुक्त, आग सहने येाग्य, पका बर्तन जब मुझे मिला तब जो आनन्द हुआ उस आनन्द की तुलना इस संसार में किसी वस्तु से नहीं हो सकती । ऐसी साधारण वस्तु से संसार में इस तरह कभी कोई खुश न हुआ होगा बर्तनों को ठंडा तक न होने दिया । मैंने एक हाँड़ी में पानी डाल कर मांस पकाने के लिए आग पर चढ़ा दिया । मेरा अभीष्ट सिद्ध हुआ। यद्यपि मेरे पास कोई मसाला न था तथापि मांस का मैंने बढ़िया शोरवा बनाया। इस परीक्षा में उत्तीर्ण होने पर मुझे बतन की दिक्कत न रही । यह कहने की आवश्यकता नहीं कि उन बर्तनों का कोई निष्टि आकार न था और न वे देखने ही में सुन्दर थे; केवल काम चलाने योग्य थे । इसके बाद मुझे यह चिन्ता हुई कि धान क्योंकर लूटा जायगा । न मेरे पास खली थी, न मूसल था, और न लोहे का ही ऐसा कोई पत्र था जिसमें कूट कर चावल निकाले जा सकें । इसके अलावा एक चक्की की भी बड़ी आवश्यकता थी। किन्तु दो हाथ मात्र उपकरण से जाँता तैयार करने की कल्पना भी पागलपन से खाली नहीं कही जा सकती । मैं किस तरह अपने उद्देश्य के सिद्ध कहँगा, यह सोच कर बड़ा ही व्यग्र हुआ। एक भी युक्ति ध्यान में न आई। मैं न जानता था कि किस तरह पत्थर काटा जाता है । दूसरी बात यह कि पत्थर काटने के उपयुक्त कोई औज़ार भी मेरे पास न था। मैंने सोचा कि यदि एक मोटा सा पत्थर का टुकड़ा मिल जाय तो उसके बीच में गड्ढा सा स्त्रोद करके