पृष्ठ:राबिन्सन-क्रूसो.djvu/१५९

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राबिन्सन क्रूसो

१४२ राबिन्सन इंस। यह द्वीप महादेश से अधिक अन्तर पर नहीं है इसलिए यहाँ मनुष्य का आना भी असम्भव नहीं । तब जो इतने दिनों से किसी का दर्शन नहीं हुआ है यह मेरा परम सौभाग्य है । मैं इस द्वीप में पन्द्रह वर्ष से निवास कर रहा हूँ, इतने दिन बाद यह कौन सा उत्पात आ खड़ा हुआ । जो हो, यहाँ असभ्यों के आने पर छिप सहूँऐसा कोई निरापद स्थान हूंढ़ निकालना आवश्यक है। न वष्कार मैंने अपने किले के पीछे वाली गुफा को खोद कर बड़ा किया था, इससे मेरे किले के भीतर घुसने का एक छोटा सा दज़ा बन गया था । इस बेजा काम के लिए इस समय मुझे अचुताप होने लगा। उस छिद्र को बन्द कर देने के लिए मैंने फिर एक घेरा बनाने का संकल्प किया। पहले खम् का घेरा बनाया था, तदनन्तर दूसरा घेरा दरत का बनाया था। इसको बारह वर्ष हुए । उसके बाद इस समय फिर खूब मज़ बूती के साथ खम्भों का अर्धचन्द्राकार एक तीसरा घेरा .बनाया । इस घेरे के भीतर हाथ जाने लायक सात छिद्र रहने दिये । घेरे के बीच की जगह को मिट्टी से भर दिया और उसके ऊपर चल फिर कर उसे अच्छी तरह पैरों से दबा दिया। इसके अनन्तर उन सातों छिद्रों में अपनी सातों बन्दूकें रख दीं। वे कहीं गिर न पड़े इसलिए लकड़ी की एक एक टेक लगा कर उन्हें अच्छी तरह स्थिर कर दिया। यदि अब मेरे किले पर कई आक्रमण करेगा तो मैं एक साथ दो मिनट के भीतर सात बन्दूकें छोड़ सऊंगा। कई महीनों के कठिन