पृष्ठ:राबिन्सन-क्रूसो.djvu/१७७

विकिस्रोत से
Jump to navigation Jump to search
यह पृष्ठ शोधित नही है
१६०
राबिन्सन क्रूसो।

१६ राबिन्सन क्रसे। कर मेरी छाती फट गई । वह दो पहाड़ों के बीच में पड़कर चूर चूर हो गया है । उसका अगला और पिछला हिस्सा समुद्र की तरड़-ताड़ना से भग्न हो गया है । जहाज़ की गढ़न देख कर मैंने समझ लिया कि वह स्पेन देश का था। जहाज़ के पास डगी के पहुंचते ही जहाज़ पर एक कुत्ता मेरो ओर भुक भुक कर पूँकने लगा। मेरे बुलाते ही वह समुद्र में कूद पड़ा। मैंने उसे अपनी डोंगी पर चढ़ा लिया। वह बेचारा मारे भूखप्यास के अधमरा सा हो गया था । मैंने ज्योंही उसके आगे एक रोटी सेंकी त्योंही वह उसे एक ही बार में निगल गया । तब उसे पीने को थोड़ा सा पानी दिया । यदि मैं उसे पानी पोने से न रोकता तो शायद वह इतना पानी पी लेता कि पेट फटने से मर जाता। इसके बाद मैं जहाज़ के ऊपर गया । देखा, रसोईघर में दो आदमी एक दूसरे से चिपके हुए मरे पड़े हैं । इस कुत्ते के सिवा जहाज़ पर क भी प्राणी जीता न मिला । दो सन्दूक मिले । उनमें क्या है, यह देखे बिना ही उन्हें उठा कर मैं अपनी डोंगी पर ले आया। कमरे के भीतर कई बन्दूकें और बारूद की थैलियाँ थीं । बन्दू कों की आवश्यकता न थी। केवल बारूद उठाकर ले आया । कितने ही काठ के बर्तनजंजीर, चिमटा और कोयला खोदने के कुदाल मिले । ये चीजें बड़ी आवश्यक थीं। इन चीज़ों और कुत्ते को लेकर मैं लौट चला, कारण यह कि भाटा शुरू हो गया था। मारे परिश्रम के थक कर मैं साँझ को अपने द्वीप में लौट आया। इतना थका था कि नाव से उतरने का साहस न हुआ। उस रात को नाव में ही सो रहा । जहाज़ से लाई हुई नई चीजों को घर न ले जाकर नवीन गुफा के भीतर रखने का निश्चय किया । सबेरे उठकर सब चीज़ों के