पृष्ठ:राबिन्सन-क्रूसो.djvu/१८१

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राबिन्सन क्रूसो।

जब मैं जाग कर उठा तब स्वन्प की बात सोच कर मेरी तबीयत बहुत ख़राब हो गई । जो हो, इस प्रकार एक भृत्य मिल जाने की चिन्ता ने मेरे मन में घर कर लिया। मैंने सेचा यदि एक असभ्य नृत्य-रूप में मिल जाय तो उसकी सहायता से मैं महादेश को जा सकता हूँ और उन राक्षसों के साथ सद्भाव रखने से मेरा उद्धार भी हो सकता है ।

इस स्वप्न ने मेरे मन पर ऐसा प्रभाव डाला कि मैं प्रति दिन समुद्र की ओर देख देख कर डोंगी आने की प्रतीक्षा करने लगा। मैं व्यर्थ की प्रतीज्ञा में एक तरह थक सा गया। इसी तरह डेढ़ वर्ष बीत गया।

डेढ़ वर्ष बाद एक दिन मैं सबेरे घर के बाहर आकर अवाक् हो गया । द्वीप के जिस भाग में मेरा घर था उसी ओर देखा कि समुद्र के किनारे पाँच डोंगियाँ बँधी हैं । उस पर एक भी सवार नहीं, सभी उतर कर कहीं चले गये हैं। अरे बाप ! एक दम पाँच पाँच डोंगियाँ ! न मालूमइस पर कितने लोग आये होंगे ? मुझे बाहर ठहरने का साहस न हुआ। मैं किले के भीतर आकर उनका हाल जानने के लिए टपटाने लगा। उन लोगों के ऊपर आक्रमण करने का सभी सामान ठीक कर मैं अवसर की अपक्षा करने लगा। अपेक्षा करते करते मैं अकुला उठा । तब बन्दूकों को ज़मीन में रख, कर सीढ़ी लगा पहाड़ की चोटी पर चढ़ गया मैंने दूरबीन लगा कर देखा कि उन लोगों ने अग्निकुण्ड प्रज्वलित किया है और उसके चारो ओर घूम घूम कर वे विचित्र अङ्ग-भङ्गि के साथ नाच रहे हैं।

मैं यह देख ही रहा था कि इतने में वे लोग नाव के पास से दो हतभागों को खींच कर ले गये । उन दोनों को मार कर