पृष्ठ:राबिन्सन-क्रूसो.djvu/१८४

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भ्रयप्राप्ति । १६५ वे राक्षस अभी खा डालेंगे । एक को लाठी मार कर उसी समय गिरा दिया और उसके आह्वप्रत्यङ्गो को काट कर टुकड़े टुकड़े कर डाले । दूसरा आदमी, अपनी मृत्यु की अपेक्षा कर के, ऑाँखों के सामने अपने साथी की दुर्दशा देखने लगा। हा ! कैसा हृदयविदारक भीषण दृश्य था ! सब अपने अपने काम में लगे थे, यह सुयोग पा कर वहां अपने को बन्धनरहति देख करतीर की तरह मेरे घर की ओोर वहाँ से निकल भागा। उसको अपने घर की ओर आते देख मैं बहुत हो डरा । शायद उसको पकड़ने के लिए उसके पीछे वे लोग भी दौड़े आवें । मैं हृदय को मज़बूत करके, साहसपूर्वक देखने लगा कि क्या होता है, देखा, सिर्फ़ तान आदमी उसके पीछे पीछे दौड़े आ रहे हैं । वह भागने वाला इस तरह बेतहाशा दौड़ा आ रहा है कि उसका पीछा करने वाले बहुत पीछे पड़ गये हैं । मेरे किले की ओर आने में, उन लोगों के मार्ग में, समुद्र की वही खड़ी पड़ती थी । समय ज्वार का था किन्तु वह भागने वाला वहाँ आा कर ज़रा भी न रुका । उसने उस अगाध खाड़ी की कुछ परवा न की । वह एकाएक उसमें धंस पड़ा और तीख बत्तीस बार हाथ चलाने में ही तैर कर पार हो गया । स्थल में आकर उसने फिर दौड़ लगाई । उसका पीछा करनेवाले भी खाड़ी के पास आये । दो आदमी पानी में घुस कर के तैरने लगे है किन्तु तीसरा आदमी शायद तैरना नहीं जानता था । वह कुछ देर वहीं खड़ा हो कर देखता रहा, इसके बाद लौट कर चला गया । उसने लौट कर मेरे और अपने हक में भी अच्छा ही किया। उसके आने से मेरे दुश्मनों की संख्या में एक की और वृद्धि होती । यह मेरे लिए