पृष्ठ:राबिन्सन-क्रूसो.djvu/१८५

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राबिन्सन क्रूसो ।

१६६ राबिन्सन क्रस । हानिकारक होती, और वह आता तो मेरे हाथ से ज़रूर मारा जाता, तो यह उसके लिए भी कभी अच्छा न होता। मैंने देखा कि भागने वाले की अपेक्षा पीछा करने वालों को उस खाड़ी के पार करने में दुगुना समय लगा। मैं झटपट पहाड़ से उतर पड़ा और दे। बन्दूकें लेकर फिर पहाड़ पर चढ़ गया। पहाड़ पर से धीरे धीरे समुद्र की ओर उतर कर शीघ्र ही उन देने—भागने और पीछा करने वालों के बीच जा पहुंचा । तब मैंने भागने वाले को पुकारा । वह पीछे मुड़ कर और मुझे देख कर और भी भय- भीत हुआ। मैं उसको हाथ का इशारा देकर और अपनी ओर आने का संकेत कर के धीरे धीरे पीछा करने वालों की ओर अग्रसर होने लगा । उन दोनों में जो आगे था उस पर एका एक आक्रमण करके मैंने बन्दूक के कुन्दे के धक्के से उसे धरती पर गिरा दिया । मैं बन्दूक की आवाज़ न करना चाहता था, क्योंकि आवाज़ होने से उसके और साथी सुन लेते। उसको गिरते देख उसका साथी ठिठक कर खड़ा हो रहा । मैं उसकी ओर झपटा । देखा तो उसके पास धनुष बाण है और वह धनुष पर तीर चढ़ा रहा है । तब मैं उसे गोली मारने को बाध्य हुआ । मैंने एक ही गोली में उसका काम तमाम कर दिया। दोनों दुश्मनों को गिरते देख भागने वाला सहस पाकर ठहर गया। किन्तु मेरी बन्दूक की आवाज़ से वह एक दम स्तम्भित और चकित हो गया। उससे न अब भागते ही बनता था और न मेरी ओर आते ही वह कुछ देर जड़वत् खड़ा रह कर फिर भागने का मौका देखने लगा। मैंने फिर उसे पुकारा। वह कुछ आगे की ओर बढ़ा। इसके बाद