पृष्ठ:राबिन्सन-क्रूसो.djvu/१९१

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राबिन्सन क्रूसो।


पहले मैंने उसे यह समझा दिया कि तुम्हारा नाम मैंने फ्रा़इडे ( शुक्रवार ) रक्खा है, क्योंकि शुक्रवार को ही वह मुझे मिला था । यह भी सिखला दिया कि तुम मुझको प्रभु कहा करो । उसको हाँ, नहीं, आदि अँगरेज़ी के छोटे छोटे शब्द भी सिखला दिये ।

एक मिट्टी के बर्तन में मैंने उसको थोड़ा सा दूध और रोटी खाने को दी और स्वयं दूध में रोटी मिला कर खाकर दिखला दिया कि दूध-रोटी इस तरह खाई जाती है । उसने खाकर इशारे से बतलाया कि दूध-रोटी खाने में बहुत बढ़िया है। उसी के साथ मैंने गुफा के भीतर रात बिताई ।

सवेरे उठ कर मैंने उससे कहा -"चलो तुमको कुछ कपड़े दूँ।" यह सुनकर वह बहुत खुश हुआ और मेरे साथ चला । अभी तक वह एक प्रकार से नंगा ही था ।

गुफा से चलकर हम दोनों वहाँ आये जहाँ फ्राइडे ने दोनों असभ्यर्थों की लाश को बालू में गाड़ रक्खा था। फ्राइडे ने ठीक जगह दिखला कर इशारा किया “आओ, हम लोग इन्हें उखाड़ कर खा लें ।" इससे मैंने अत्यन्त क्रोध प्रकट करके अपनी घृणा सुचित की। मैंने इशारे से दिखाया कि ऐसी बात कहने से मुझे उबकाई आती है। ऐसी बात फिर कभी मुँह से न निकालना । मैंने उसको वहाँ से चले आने का इशारा किया। उसने बड़े बिनीत भाव से मेरी आशा का पालन किया।

इसके बाद मैं उसको साथ लेकर पहाड़ पर चढ़ा। दूर-बीन लगा कर देखा तो अग्निकुण्ड के पास एक भी असभ्य न था। उन लोगों की डोंगियाँ भी न थीं । वे अपने साथियों की