पृष्ठ:राबिन्सन-क्रूसो.djvu/१९८

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क्रूसो और फ़्राइडे।

फ़्राइडे-नहीं, डोंगी कभी भारी नहीं जाती। प्रातःकाल समुद्र में हवा और जल का स्रोत एक ओर बहता है; साँझ को विपरीत दिशा में यह समझ लेने से समुद्रयात्रा में विपत्ति की आशङ्का नहीं रहती।

फ़्राइडे की इस बात से मैं समझ गया कि वह ज्वार-भाटे की बात कह रहा है। आखिर मैंने फ़्राइडे के कथन से समझा कि मेरा यह द्वीप अरुणक नदी के मुहाने पर है। उसी नदी के स्रोत की बात फ्राइडे कह रहा है। आग्नेय (पूरब और दक्खिन) कोण में जो द्वीप देख पड़ता है वह त्रिनिडाद टापू है। मैंने फ़्राइडे से उसके देश के सम्बन्ध में हज़ारों प्रश्न किये। उसे जहाँ तक मालूम था, सब का उत्तर दिया। उसकी जाति का नाम कारिब था। इससे मुझे मालूम हुआ कि नक़्शे में जो क्यारिबी द्वीप है वहीं के अधिवासी ये लोग हैं। फ़्राइडे ने कहा-मेरे देश में जहाँ चन्द्रमा डूबते हैं उसके आगे अर्थात् पश्चिम दिशा में बहुत दूर आपके ऐसे गोरे लोग हैं। वे लोग भी मनुष्य-हत्या करने में नहीं चूकते।" इससे मैंने समझा कि वे लोग स्पेनवाले हैं। उन्हीं के बारे में यह कह रहा है। उन की अकारण निष्ठुर हत्या का प्रवाद प्रायः देश-देशान्तर में फैला हुआ था।

मैंने पूछा-फ़्राइडे, तुम ऐसा कोई उपाय बता सकते हो जिससे मैं उन गोरे लोगों के पास तक पहुँच सकूँ।

फ़्राइडे-क्यों नहीं, ज़रूर पहुँच सकते हैं। दो डोगियों पर जाना होगा।

दो डोगियों पर जाना होगा, इसका मतलब मेरी समझ में न आया। बहुत पूछने पर मैंने समझा, कि दो डोंगियों

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