पृष्ठ:राबिन्सन-क्रूसो.djvu/१९९

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राबिन्सन क्रूसो।


से उसका मतलब दो डोंंगियों के बराबर एक बड़ी नाव से है। अब से मैं अपने उद्धार की कुछ कुछ आशा करने लगा । मेरे जी में इस बात की आशा ने जड़ बाँधी कि इस असभ्य की सहायता से मेरा छुटकारा होना असम्भव नहीं है। मैं जब तब फ्रा़इडे के साथ इस बात की आलोचना करके बहुत सुख पाता था।

जब फ्रा़इडे मेरी भाषा अच्छी तरह सीख गया तब मैंने उसको कुछ धर्म की शिक्षा देना उचित समझा। कारण यह कि धर्म-हीन जीवन भार मात्र है। धर्म-ज्ञान के बिना जीना वृथा है। मैंने एक दिन उससे पूछा-अच्छा, कहो तो फ्रा़इडे, तुमको किसने सिरजा है ?

यह अद्भुत प्रश्न सुन कर फ्राइडे कुछ चकित सा होकर बोला- “क्यों, मेरे पिता ने ।" मैंने फिर हँस कर पूछा-अच्छा, ये सब समुद्र, धरती, पहाड़ और जङ्गल किसने बनाये हैं ?

फ्रा़इडे-“वीणामुख ने ! वे सबसे रहित हैं । वे भूमि, समुद्र, चन्द्र, सूर्य और तारागणों की अपेक्षा भी पुरातन हैं। वही सम्पूर्ण संसार के सृष्टिकर्ता हैं। उन्हें सब लोग जगत्पिता कहते हैं । मृत्यु होने के अनन्तर सभी प्राणी उन्हीं वीणामुख के साथ जा मिलते हैं ।” ईश्वर के सम्बन्ध में मनुष्य का स्वाभाविक ज्ञान देख कर मैं पुलकित हो उठा। मैं फ्रा़इडे के इस अस्फुट भगवद्ज्ञान को और विशद करने के लिए उसको सर्वशक्तिमान् विधाता के सम्बन्ध में अनेक बातें सुनाने लगा। यद्यपि मैं स्वयं खूब ज्ञानी या धार्मिक न था तथापि मैं भगवान् से ज्ञान की