पृष्ठ:राबिन्सन-क्रूसो.djvu/२४०

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क्र का द्वीप से उद्धार । २१8 औ जब हम लोग गिरफ्तार किये गये थे तब कप्तान ने कहा था कि तुम लोगों को प्राणभय न होगा । इस समय हम लोग उसी का स्मरण दिलाते हैं । ” मैंने कहा-“मैं तुम लोगों के साथ कौन सा दया का व्यवहार करेंमेरी समझ में नहीं आता। मैंने इस टापू को छोड़ कर कप्तान के जहाज़ पर सवार हो हैंगलैंड जाने का निश्चय किया है । तुम लोगों को रैंगलैंड ले जाता हूं तो वहां विद्रोह के अपराध में तुम लोगों का प्राणवध अनिवार्य होगा । इस लिए इस टापू में रहने के सिवा तुम लोगों की प्राणरक्षा का अन्य उपाय नहीं । यदि तुम लोग पसन्द करो तो मैं तुम लोगों को इस टापू में छोड़ सकता हूं ।' मेरी इतनी बड़ी दया देख वे लोग कृतज्ञतापूर्वक मेरे प्रस्ताव पर सम्मत हुए । तब मैंने उन लोगों को बन्धन मुक्त कर दिया। मैंने कप्तान को यह कह कर जहाज़ पर भेज दिया कि जाओ, जहाज़ पर सब इन्तज़ाम ठीक करो । इधर मैं अपने साथ जहाज़ पर ले जाने योग्य वस्तुओं की व्यवस्था करने लगा । कल सबेरे जहाज़ पर सवार हो कर रवाना हूँगा । कतान के चले जाने पर मैंने बन्दियों से कहा, “तुम लोगों ने जो यहाँ रहना पसन्द किया यह बड़ा अच्छा किया । हँगलैंड जाने से तुम लोगों को ज़रूर फाँसी होती । यहाँ जीते जागते तो रहोगे । विशेषतपाँच आदमी एक साथ मिल कर बड़े सुखचैन से रह सगे मैं तो अकेला ही यहाँ इतने दिन बना रहा ' यह कह कर मैंने अपना सब इतिहास उनको कह सुनाया। झोप का और जीवननिर्वाह का तत्व उन लोगों को समझा दिया । मैंने उन लोगों को अपना किला घरद्वार, खेत-खलिहान, और बकरों का गिरोह आदि सभी