पृष्ठ:राबिन्सन-क्रूसो.djvu/२३९

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राबिन्सन क्रूसो।

यह सब कार्य होने के बाद हम लोग सोचने लगे कि अब बन्दियों का क्या करना चाहिए। जो लोग शातिर बदमाश हैं उन को साथ रखना हम लोगों के हक में हानिकारक है या नहीं, यह बिचारने का विषय है। कप्तान ने कहा, "उन बन्दियों में दो व्यक्ति पहले नम्बर के बदमाश हैं। वे लोग किसी तरह काबू में नहीं आ सकते। यदि उन लोगों को संग ले चलना हो तो उनको हथकड़ी-बेड़ी डाल कर ले चलिए। वहाँ जाकर उन्हें पुलिस के सिपुर्द करने के सिवा और कोई उपाय नहीं।" तब मैंने कहा-अच्छा, यदि उन्हें इसी टापू में रहने को राजी कर सकूँ तो?

कप्तान-तब तो बड़ा ही अच्छा हो। मैं इसे हृदय से पसन्द कर सकता हूँ।

मैं-अच्छा, उन लोगों को बुना कर तुम्हारे सामने उनसे यह प्रस्ताव करता हूँ।

फ़्राइडे और दो बन्धन-मुक्त नाविकों को कुञ्जभवन से पाँचौ कैदियों को बुला लाने के लिए भेजा। उन बन्दियों के आने पर मैं नई पोशाक पहन कर सेनापति के वेष में उनके पास गया। मैंने अपराधियों से कहा-तुम लोगों के विरुद्ध आचरण करने की बात मैंने सुनी है। यह ईश्वर की कृपा ही समझनी चाहिए कि तुम लोग अधिक पाप करने के पहले ही मेरे हाथ बन्दी हुए हो। जहाज़ भी मैंने अपने कब्जे में कर लिया है। तुम लोग अपने नये कप्तान की मृत्यु भी अपनी ही आँखों देखोगे। अच्छा, अब तुम लोगों को क्यों न प्राण-दण्ड दिया जाय?

उन में एक व्यक्ति सब का अगुवा होकर बोला-"इस सम्बन्ध में हम लोगों को कुछ कहने की गुञ्जाइश नहीं। किन्तु