पृष्ठ:राबिन्सन-क्रूसो.djvu/२५३

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राबिन्सन क्रूसो ।

२३० राबिन्सन से । फिरा कर ऐसे मार्ग से ले चला कि पहाड़ को चोटी पर चढ़ने से भी अधिक बर्फ न मिली। हम लोग जब पहाड़ की चोटी पर चढ़े तब एक दिन और एक रात बराबर पाला गिरता ही रहा। इससे हम लोग डर गये, किन्तु पथप्रदर्शक ने कहाडरने की कोई बात नहीं है ।’ यह सुन कर हम लोगों को कुछ साहस हुआ और तब से बराबर हम लोग पहाड़ के नीचे उतरने लगे । हम लोग उस व्यक्ति के पीछे पीछे उसीके ऊपर भरोसा करके जाने लगे । एक दिन सॉ होने के कुछ पहले एकाएक तीन बड़े बड़े भेड़िये और उनके पीछे पीछे एक भालू जडूल से निकल कर हम लोगों के पीछे पड़ गये । ज़रा सी कसर रह गई थी, नहीं तो वह दिन जन्तु पथप्रदर्शक के वहीं खतम कर देता। वह घबरा कर हम लोगों को पुकारने लगा। पिस्तौल निकाल कर उन पर गोली चलाने की भी सुध उसको न रही । पथ प्रदर्शक के पास ही फ्राइडे था उसने खूब साहस कर घोड़ा दौड़ा कर भेड़िये को गोली से मार गिराया। भाग्य से ही उस व्यक्ति के समीप प्राइडे था इससे वह बच गया, दूसरा कोई रहता तो इस तरह साहस कर के भेड़िये का मुकाबला नहीं कर सकता। दूर से गोली मारने में यह भय था कि क्या जाने भेड़िये को लगे या न लगे । जो पथप्रदर्शक को ही गोली लग -.. जाती तो मामला चौपट था। जो हो, हम लोग भेड़िये को देख कर बहुत ही डरे। फ्राइडे के तमंचे की आवाज़ होते ही जहूल के दोनों ओर भेड़ियों का घोर और हुंकार होने लगा । वह कठोर शब्द गर्जन पर्वत कक कन्दरा में प्रतिध्वनित हो कर दूना भयढेर हो उठा। । प्राइडे की गोली की चोट खा कर एक भेड़िया वहीं ठंडा हो