पृष्ठ:राबिन्सन-क्रूसो.djvu/२५८

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जीवनवृत्तान्त के प्रथम अध्याय का उपसंहार । २३५ हुआ परन्तु मैंने उसे ऐसा करने से रोका । बीच मैदान में जाते न जाते हम लोगों ने भेड़ियों का गर्जना सुना और कुछ ही देर बाद देखा कि डेढ़ सौ भेड़िये का झण्ड हम लोगों की । ओर आ रहा है। हम लोग इसका क्या प्रतीकार करेंगेयह 1 लेच कर भी कुछ ठीक न कर सकते थे । आख़िर हम लोग कतार बाँध एक दूसरे से सट कर खड़े हो गये । मैंने सबसे कह दिया कि एक साथ सब बन्दूकें न चला कर एक के बाद दूसरी बन्दूक चलाई जाय । इससे यह फायदा होगा कि जब तक और लोग गोली चलायेंगे तब तक दूसरों को बन्दूक भरने का अवकाश मिलेगा । इससे बन्दूक की आवाज़ लगा तार जारी रहेगी जिससे संभव है कि भेड़ियों को गतिरुक जाय । हम लोगों की पहली बार की बन्दूकें छूटते ही बन्दू कों का शब्द और आग की झलक देख कर सभी भेड़िये डर कर खड़े हो रहे । चार मरे और कई एक घायल होकर भागे । मैंने कभी सुना था कि मनुष्यों की चिल्लाहट सुन कर भेड़िया डरता है । इसलिए मैंने सभी को एक साथ घु ब ज़ोर से चिल्लाने का परामर्श दिया। यह उपचार एकदम व्यर्थ न हुआ। हम लोगों के चिल्लाते ही भेड़िये मुंह फेर कर भागने को उद्यत हुए । तब मैंने अपने साथियों के उन पर पीछे से गोली चलाने की आज्ञा दी । पीछे से गोली की चोट खाकर मरते गिरते लड़खड़ाते हुए वे सब जंगल के भीतर जा घुसे । यह अवसर पाकर हम लोग बन्दूकें भर कर बड़ी शीघ्र गति से जाने लगे । किन्तु दो चार डग आगे जाते न जाते हम लोगों ने अपनी बाईं ओर के जंगल में वन्य जन्तुओं का भय दुर चीत्कार सुना । किन्तु वह शब्द हम लोगों के सामने की ओ ओोर होता था। हमें लोगों को उधrर ही ले जाता था।