पृष्ठ:राबिन्सन-क्रूसो.djvu/२५९

विकिस्रोत से
Jump to navigation Jump to search
यह पृष्ठ शोधित नही है
२३६
राबिन्सन क्रूसो ।

२३६ राबिन्सन झूले । अब दिन नाममात्र को भी न रहा। सूर्यास्त होने पर अन्धकार का साम्राज्य क्रमशः बढ़ चला । यह हम लोगों के पक्ष में कुछ भी सुखकर न था। जितना ही आन्धकार बढ़ने लगा उतना ही अंधिक भेड़ियों का कोलाहल होने लगा। इतने में क्या देखता हूँ कि भेड़ियों का एक झुण्ड हम लोगों की बाँई अर, एक झुण्ड सामने और एक झुण्ड पीछे आकर हम लोगों को घेर कर खड़ा हुआ । किन्तु उन सब को आक्रमण की वे टा करते न देखहम लोगों से जहाँ तक हो सका, हम जल्दी जल्दी आगे बढ़ चले । किन्तु रास्ता नीचा ऊँचा होने के कारण शीघ्रता करने पर भी रास्ता बहुत कम कटता था। इस प्रकार क्रमशः आगे बढ़ते बढ़ते हम लोग एक जगल के प्रवेशपथ में पहुंचे। इस बन से पार होने पर हम लोगों का आज का सफर पूरा होगा और हम लोग एक निर्दिष्ट स्थान में पहुँच जाएँगे। यह देख कर हम लोगों को बड़ा ही आश्चर्य हुआ कि वन के भीतर प्रवेश करने के पथ में कितने ही भेड़िये पहले ही से खड़े हो आगन्तुकों की राह देख रहे हैं। वन के अन्य भाग में अकस्मात् बन्दूक की आवाज़ हुई। आवाज़ होने के कुछ ही देर पीछे हम लोग देखते हैं कि एक ज़ीनकसा घोड़ा वायु वेग से दोड़ा चला आ रहा है और जंगल से बाहर निकल गया । पन्द्रहसोलह भेड़िये उसका पीछा किये चले आ रहे हैं। घोड़ा यद्यपि भेड़ियों से बहुत आगे था तथापि उन के पंजे से निकल भागना उसके लिए असंभव था। भेड़िये के साथ घोड़ा कब तक दौड़ सकता है । बात की बात में भेड़ियों के झुण्ड ने घोड़े को धर दबाया और उसे मार खाया। हम लोगों ने जंगल के भीतर प्रवेश करके और भी भयडूर दृश्य देखा। रास्ते में एक घोड़ा और दो मनुष्य मरे पड़े हैं और