पृष्ठ:राबिन्सन-क्रूसो.djvu/२७४

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दूसरी बार की विदेश-यात्रा। २५१ घोर अन्धकार में छिपे हैं । हम लोग कुछ निश्चय न कर सके कि वे अभी किस अवस्था में हैं। उन लोगों को सूचना देने के लिए मैंने अपने जहाज़ के चारों ओर रोशनी कर दी और गोलन्दाज़ से सारी रात तेप की आवाज़ करने को कह दिया। हम लोगों ने जाग कर रात बिताई । सबेरे आठ बजे हम लोगों ने दूरबीन लगा कर देखा कि दो छप्परदार नावें आरो हियेां से भरी हुई बिरनी को तरह बोच समुद्र में नाच रही हैं। हवा हम लोगों की ओर से हो कर बहती थी । वे प्रतिकूल वायु में पड़ कर प्राणपण से नाव खे कर हम लोगों की ओर आ रहे थे और हम लोगों की दृष्टि को अपनी ओर आकृष्ट करने के लिए भाँति भाँति की चेषायें कर रहे थे । हम लोगों ने झडी उड़ा कर उन लोगों को संकेत द्वारा जता दिया कि हम लोगों ने तुमको देख लिया। अब हम लोग पाल तान कर बड़ी तेज़ी से उन लोगों की ओर अग्रसर होने लगे । आध घंटे में हम लोग उनके पास पहुंच गये और चौंसठ पुरुषस्त्री और बालकों को अपने जहाज़ पर चढ़ा लिया । दरिया करने से मालूम हुआ कि वह एक फ्रांसवाली सौदागर का जहाज़ है, कनाडा देश के क्यूबिक शहर से देश को जा रहा था । माँक्षियों की असावधानी से जहाज़ में भाग लग गई और बहुत उपाय करने पर भी बुझ न सकी। तब जहाज़ के सभी यात्री निरुपाय हो कर नाव पर सवार हुए । उन लोगों के भाग्य से खूब बड़ी बड़ी दो नावें साथ में थीं, इससे वे लोग झटपट कुछ खानेपीने की चीजें ले कर उन पर उतर आये । किन्तु नाव पर सवार हो जाने पर भी अपार समुद्र में उन लोगों के प्राण बचने की आ। शा ी थी। 5 केवल दुराशा छात्र थी कि कोई जहाज उन लोगों को आश्रय दे