पृष्ठ:राबिन्सन-क्रूसो.djvu/२७३

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राबिन्सन क्रूसो ।

२५० राबिन्सन क्रस । लोग आग्निप्रकाश के अतिरिक्त और कुछ नहीं देख सकते थे। आध घंटे के बाद हम लोगों ने स्पष्ट देखा कि समुद्र में एक बड़ा सा जहाज़ जल रहा है । यह देख कर हम लोगों के हृदय में दया उमड़ आई। यद्यपि हम लोग न जानते थे कि यह कहाँ का जहाज़ है। और वे लोग किस देश क के यात्री हैं, तथापि उन लोगों की वेदना से हम लोग व्याकुल हो उठे । तब मुझे अपनी विपत्तियों से उद्धार पाने की बात स्मरण होने लगी। यदि उन विद्ग्रस्त बेचारों के पास और कोई नाब न हो तब उनकी न मालूम क्या दुर्दशा होगी, यह विचार कर मैंने आज्ञा दी कि हमारे जहाज़ से पाँच बार तेप की आवाज़ की जाय। इससे वे लोग समझेगे कि उनके सहायक निकट वर्ती हैं और वे नाव पर आरूढ़ हो कर अपनी प्राणरक्षा कर सकेंगे। आाग के कारण हम लोग उनके जहाज़ को देख सकते थे, पर वे लोग हमार जहाज़ को नहीं देख सकते थे। हम लोग प्रातःकाल की प्रतीक्षा करने लगे । इतने में एकाएक वह जलता हुआ जहाज़ आकाश की ओर उड़ गया और देखते ही देखते आग एक दम बुझ गई । समुद्र गढ़ अन्धकार में डूब गया। ऐसा मालूम हुआ जैसे वह जहाज़ सर्वदा के लिए समुद्र के गर्भ में विलीन हो गया। हम लोग यद्यपि ऐसी ही किसी दु टना की आशट्ठा कर रहे थे तथापि उसे आंखों के सामने होते देख हम लोगों के मन में बड़ा ही भय हुआ। उस जहाज़ के यात्रियों की दुर्दशा की बात सेच कर जी व्याकुल होगे लगा। वे लोग या तो जहाज़ के साथ जल गये होंगे या समुद्र में डूब कर मर गये होंगे अथवा इस ‘अपार महा i - सागर में नाव के ऊपर डूबने ही पर होंगे ? वे सब के सब ।