पृष्ठ:राबिन्सन-क्रूसो.djvu/२८७

विकिस्रोत से
Jump to navigation Jump to search
यह पृष्ठ शोधित नही है
२६४
राबिन्सन क्रूसो

२६४ राबिन्सन क्रो । बिछौने पर जा कर लेट रही, लेटते ही नींद आ गई । तीन घंटे के बाद नींद टूटने पर कुछ आराम मालूम हुआ । फिर सोने की चेष्टा की, पर नींद न आई । पाँच बजे सबेरे तक जागती रही, तब बड़ी कमज़ोरी और क्लान्ति मालूम होने लगी । दूसरे दिन भी पहले तो बड़ी भूख लगी फिर उबकाई आने लगी । रात में सिर्फ थोड़ा सा पानी पीकर सो रही । नींद आने पर सपने में देखा कि मैं एक बाज़ार में गई हैं। बाज़ार के दोनों ओर अनेक प्रकार के पकवानों की दुकानें लगी हैं । मैंने भाँति भाँति की खाने की चीजें खरीद कर खामिनी को दीं और मैंने भी पेट भर खाया। इसके बाद मेरा पेट खूब भरा हुआ सा मालूम होने लगा जैसे दूसरे के घर से भोज खाकर आई हूं। जागने पर मैंने देखा कि मैं एकदम विह्वल हो गई हूं। मैंने थोड़ा सा चीनी का शरबत बना कर पिया । रात में कितना ही भलाबुरा सपना देख कर जब सबेरे जाग उठी तब भूख से मेरे पेट में आग सी लग रही थी। राक्षसी सुधा ने मुझे बेहाल कर दिया था । मेरी गोद में यदि बच्चा होता तो उस समय उसे कच्चा ही खा डालतीऐसी दुजय दुर्निवार सुधा व्याप रही थी । भूख के मारे मैं एकदम उन्मादिनी हो उठी । ऐसी उन्मादिनी कि गारद में रखने येाग्य । मैं पागलपन करते करते, खाट के पाये पर गिर पड़ी जिससे नाक में बड़ी चोट लगी, नाक से खून गिरने लगा । कुछ लोढ़ बाहर निकल जाने से मुझे कुछ चैतन्य हो आया और फिर उबकाई आने लगी पर के न हुई । होती क्या ? जब कुछ पेट में रहे तब तो !कुछ देर के बाद मैं मूछित होकर गिर पड़ी । सभी ने समझा, मैं मर गई । मेरे पेट में एक अनिर्वचनीय यन्त्रणा होने लगी । छंतड़ियाँ ऐंठने लगीं। क