पृष्ठ:राबिन्सन-क्रूसो.djvu/२९५

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२७२ राबिन्सन से। जाने का बहाना कर के दो डगियाँ माँग लीं। उन्हीं पर सवार हो कर वे लोग यहाँ चले आये । इन लोगों के साथ वे तीनों अँगरेज़ नाविक पहले अच्छा सलूक करते थे । स्पेनियर्ड लोग ढ़ ढूंढ़ कर खाद्य सामग्री लाते थे और वे लोग बाबू साहब की भाँति बड़े चैन से खाते और द्वीप में इधर उधर घूम फिर कर सैर करते थे । फिर उन्होंने क्रम क्रम से इन लोगों पर अत्याचार करना आरम्भ किया। कभी इन लोगों का खेत काट कर पशुओं को खिला देते , कभी पालतू बकरों को मार डालते थे और कभी गोली भर कर मारने का भय दिखलाते थे । कभी घर में आग लगाने की धमकी देते थे। एक दिन एक स्पेनियर्ड ने उनके इस नीच व्यवहार का प्रतिवाद किया । क्रमशः बात ही बात में झगड़ा बढ़ चला । तब उन्होंने स्पेनियर्स को पराजित करने का संकल्प किया । इसलिए स्पेनियड ने उनसे हथियार छीन लिये। निरम होने पर वे दुष्ट क्रोध से एकदम पागल हो उठे और स्पेनियङ से सम्पर्क त्याग कर चले गये। पाँच दिन के बाद तीनों आदमी घूमतेफिरते थकेमांदे भूख से व्याकुल होकर लौट आये और बड़े विनीत भाव से उन लोगों से आश्रय की प्रार्थना की । स्पेनियड ने बडी शिष्टता से उन्हें खानेपीने के दिया और बड़ी मुलायमियत से समझा दिया कि इस मुदूरवर्ती द्वीप में हम लोग इने गिने कई मनुष्य हैं । यदि इन कई व्यक्तियों में परस्पर मेल न रहा, सद्भाव न रहा तो यह बड़ी लज्जा का विषय है। इस प्रकार की शिक्षा और मीठे तिरस्कार से उन लोगों ने अपनी भूल स्वीकार ‘की और० अपराध के लिए क्षमा प्रार्थना की । फिर वे इस शर्त पर रख लिये गये कि जिन कामों को वे बिगाड़ गये हैं