पृष्ठ:राबिन्सन-क्रूसो.djvu/३११

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राबिन्सन क्रूसो।

२८ट राबिन्सन क्रूसे। उन लोगों के चले जाने पर द्वीप-वासियों ने एक बार वहाँ जाकर देख आना चाहा कि असभ्यगण क्या करने आये थे । सभी लोगों ने वहाँ जाकर देखा, जहाँ वे उतरे थे। तीन असभ्य धरती पर लेटे घोर निद्रा में अचेत पड़े थे । शायद ये लोग बेघन्दाज़ नरमांस खाकर, आफर करले रहे थे । निद्रित होने के कारण इन्हें मालूम ही नहीं हुआ कि साथी लोग कब चले गये । संभव है, इनकी नींद ने टूटी हो और वे लोग बिना जगाये चल दिये हों अथवा ये लोग जंगल में घूमने गये होंगे। जब इन लोगों ने लौट कर देखा होगा कि साथी चले गये तब निश्चिन्त होकर सो रहे होंगे । जो हो, उनको रोते देख सभी भय और आश्चर्य से ठिठक रहे । सभी ने सर से पूछा कि इन लोगों के साथ कैसा बर्ताव करना चाहिए। सदर की समझ में भी कुछ न आता था जो अपनी राय ज़ाहिर करते । द्वीप-वासिये के पास बहुत से दास थे ही, वे और लेकर करेंगे ही क्या, या उन्हें खाने ही को क्या देंगे ? तब इन असभ्यों को मार डालना चाहिए । किन्तु इन लोगों का अपराध ही क्या है ? निर्दोष बेचारों को प्राणदण्ड देना भी तो ठीक नहीं । निर पराधियों को मारने में राक्षसों का भी हाथ सहसा नहीं उठता। बड़े बड़े निर्देय और नृशंस भी ऐसे काम में सर्वोचित हो उठते हैं । वे असभ्य जागने पर चले जाते तब तो सब बखेड़ा ही मिट जाता। किन्तु बिना नाव के वे लोग जायेंगे कैसे १ जागने पर वे लोग द्वीप भ्रमण में प्रवृत्त होंगे और द्वीपवासियों का पता पाकर अनर्थ का बीज बोयेंगे । अन्ततो- गत्वा यही स्थिर हुआ कि उन लोगों को कैद करके रखना चाहिए । वे जगा कर कैद कर लिये गये । जब नक हाथों