पृष्ठ:राबिन्सन-क्रूसो.djvu/३२३

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३०० राबिन्सन क्रसे। सर—नहीं भाईआज तुमने बड़ी बहादुरी के साथ लड़ाई की है । यदि कल तुम युद्ध न भी कर सकोगे तो तुम्हारी ओर से खुद में युद्ध करूँगा। चटकीली चाँदनी रत है । हम लोगों ने देखा कि असभ्य लोग अपने मुद्दों और घायलों को लेकर बड़ी चिन्ता में पड़े हैं । सभी आपस में अपने मन की बातें कर रहे हैं । यह देख कर सदर ने उन असभ्ों पर एक बार रात में ही आक्रमण करने का विचार किया। हम लोग जंगल के भीतर ही भीतर छिप कर इधर उधर चक्कर काटते हुए एकदम असभ्यर्थों के समीप जा पहुंचे । हम लोगों ने एक साथ आठ बन्दू कें दाग दीं। आध मिनट के बाद फिर आठ बन्दूक की आवाज हुई । कितने ही मरेऔर कितने ही घायल हुए । असभ्य लोग किधर भागेंकुछ निर्णय न कर जहां के तहाँ खड़े हो मरने लगे । हमारे आठ आठ आदमियों की तीन टोलियाँ हो गई और तीनों तरफ़ से एक साथ सिंहनाद करके उन असभ्याँ पर टूट पड़ेऔर उन सबों को लाठी, बन्दूक के कुन्देफरसे और कुल्हाड़ी आदि हथियारों से मारने लगे । थोड़ी ही देर में असंख्य असभ्य भूतलशायी हो गये । दोएक ने तीर मारने की चेष्टा की थी किन्तु उन्हें अवसर न मिला। एक तीर ने फ्राइडे के पिता को किश्चित् घायल किया था जो असभ्य बचे वे चिल्लाते हुए जहाँ तहाँ भाग गये । हम लोग उनको मारते मारते थक गये थे इस लिए उनका पीछा न कर सके । कुल १८०असभ्य मारे गये बचे हुए असभ्य दौड़ कर समुद्रतट में अपनी नाव पर सवार होने गये। किन्तु उन लोगों पर