पृष्ठ:राबिन्सन-क्रूसो.djvu/३२२

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द्वीप में असभ्यर्थी का दुबारा उपद्रव। २88 थे और बराबर आगे बढ़े ही आते थे उन्होंने इतने बाण चलाये कि बाणों से आकाशमण्डल भर गया। उन असभ्यों में जो व्यक्ति घायल हुए थेपर पूरे तौर से जख्मी नहीं हुए थे, उन लोगों के सिर पर खून सवार होगया था। इसीसे वे लोग पागल की भाँति युद्ध करते थे। असभ्य लोग अँगरेज और स्पेनियर्ड की लाश को देख उस पर हथियार चलाने लगे, मरे को मारने लगे। उन मुद्दों के हाथपैर, और गला काट कर मृतशरीर को खण्ड खण्ड कर के उन्होंने अपनी नीचता का परिचय दिया । हम लोगों के भागते देख कर उन लोगों ने दूर तक पीछा न किया । सभी ने मण्डलाकार खड़े होकर दो बार उच्चस्वर से जयध्वनि की । किन्तु उनके घायल आदमी अधिक लहू बहने के कारण च्छित तथा प्राणहीन हो होकर गिरने लगे । यह देख कर वे लोग फिर दुदुःखी हुए। एटकिंस की इच्छा थी कि फिर दलबल के साथ उन पर आक्रमण किया जाय किन्तु सदर ने कहा -‘नहीं, इसकी अब जरूरत नहीं । कल सबेरे फिर देखा जायगा । आज अब शान्त होकर रहना ही ठीक है । असभ्यों के घायलों की भली भाँति सेवा शुध्षा न होने से उनकी हालत बुरी हो जायगो । अधिक रक्तक्षय होने से वे दुर्बल हो जायग और घाव की पीड़ा से चलफिर न सकेंगे तब हम लोगों के शत्रुओं की संख्या और भी कम होगी ।39 एटकिंस ने जरा हंस कर और जोर देकर कहा -हाँ हाँ, कल मेरी भी तो वैसी ही दशा होगी । इसी कारण तो चटपट आज ही काम चुका लेना चाहता हूं । 1