पृष्ठ:राबिन्सन-क्रूसो.djvu/३२८

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उपनिवेश में समाज और धर्मसंस्थापन। ३०५. ट वे लोग निर्देन्द्र होकर घूमतेफिरते हैं और अपनी खेतीबाड़ी करते हैं। अब वे लोग बड़े सीधे सादे हो गये हैं और हम लोगों की आज्ञा के अनुसार काम करते हैं। वे लोग अब था समय नष्ट न कर भाँति भाँति के टोकरेडलियाँचलनी कुर सी, टेबलखाटआलमारीबक्स, आदि सुन्दर सुन्दर काम की चीजें तैयार करके सबका अभाव दूर करते हैं । वे लोग अब अच्छे शिष्ट और सभ्य बन गये हैं । थे उपनिवेश में समाज और धर्मसंस्थापन इन अनेक घटनाओं के बाद इस टापू में मेरा आकस्मिक आगमन मेरे उपनिवेश-वासियों के लिए ईश्वर प्रेरित आशी वद ही की तरह सुखद हुआ था । मैंने इस टापू में आकर उन लोगों के सभी प्रकार के अभावों को दूर कर दिया। वे लोग मुझसे , कैंचीकुदाल, खनती, और कुल्हाड़ी आदि उपयोगी औज़ार पाकर अपने अपने घर बनाने लग गये । विल एटकिंस पहले जैसा आलसी था वैसा ही अब ब्याह करने पर परिश्रमी हुआ। उसने अत्यन्त सुन्दर सुदृढ़ घर बनाया। उसमें चटाइयाँ बुन कर लगाईं । घर के चारों ओर खूब गोल घेरा बना दिया । उसके बीच में उसका घर अष्ट- दल कमल की भाँति शोभायमान हो रहा था । उसके प्रत्येक कोने में उसने खूब मज़बूत खम्भे की टेक लगा रक्खी थी। उसने अपनी ही बुद्धि से काठ की धौंकनी तथा लोहे की हथौड़ी और नेहाई बना कर काम चलाने लाक लोहे की कितनी ही चीजें तैयार कर ली थीं। २०