पृष्ठ:राबिन्सन-क्रूसो.djvu/३२९

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३०६ राबिन्सन क्रसे। एटकिंस के घर में आंगनदालान, चबूतरा और बरांडा सभी ऐसे सुन्दर थे और सर्वत्र ऐसी सफ़ाई थी कि जो देखते ही बन आवे। एटकिंस के घर से सा हावना घर मैंने और कहीं नहीं देखा। इस घर में एटकिंस और उसके दो साथियों के कुटुम्बी लोग रहते थे। जो व्यक्ति असभ्यों के हाथ लड़ाई में मारा गया था उसकी विधवा स्त्री अपने तीन बच्चों को लेकर यहीं रहती थी । और भी सन्तान सहित दो विधवाओं का यह प्रतिपालन करता था । वे स्त्रियाँ भी ग्रहकार्य में बड़ी चतुर थीं । उन्ने अँगरेज़ पति पाकर अँगरेज़ी बोलना सीख लिया था। उनके लड़के भी अँगरेज़ी बोलते थे। मैंने उन सब बच्चों को जाकर देखा । सब से बड़े बच्चे की उम्र छः वर्ष की थी। मैंने देखाइस समय स्पेनिय और अँगरेज़ों के बीच किसी तरह की अनबन न थी । दोनेां मिल जुल कर अपना अपना काम करते थे। मैंने एक भोज देकर सबको सम्मानित किया। मेरे जहाज़ के रसोइये ने भोजन बना कर सब को खिलायापिलाया । बहुत दिनों बाद स्वादिष्ट भोजन पा कर सभी लोग अपनी रसना को परितृप्त कर के प्रसन्न हुए। भोज का जलसा समाप्त होने पर मैंने जहाज़ पर से वे चीजें उठवा भंगाई जो उन लोगों के लिए अपने साथ लाया था । उन लोगों में वे चीजें मैंने इस हिसाब से बाँट दीं कि जिसमें उन लोगों में पीछे से आपस में, समान भाग न मिलने के कारणतकरार न हो । मैंने उन सौगाती चीज़ों को बराबर बराबर बाँट दिया। मैं उन लोंगों का यहाँ तक हितचिन्तक था, यह देखकर उन लोगों का हृदय प्रेम से पसीज उठा और सारा शरीर । ।