पृष्ठ:राबिन्सन-क्रूसो.djvu/३३३

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राबिन्सन क्रूसो।

लाजि़मी है। परन्तु बात यह है कि मैं किसी तरह फ्रा़इडे को छोड़ भी दूँ तो वह मुझे न छोड़ेगा।

यह सुन कर पुरोहित चिन्तित हुए । वे बेचारे फ्रांसीसी थे । वे किसकी भाषा नहीं समझते थे और न कोई दूसरा ही उनक बोली समझ सकता था। तब उपाय क्या? तो क्या भगवान् की महिमा के प्रचार का कोई उपाय न होगा? मैंने उनसे कहा—फ्रा़इडे के पिता ने स्पेनिश भाषा सीखी है और आप भी कुछ कुछ स्पेनिश भाषा जानते हैं, इसलिए उसी के द्वारा आपका काम निकल जायगा।

यह बातचीत होने के पीछे मैंने अँगरेज़ों को बुला कर उनसे विधिपूर्वक ब्याह करने की बात कही। वे सभी इस प्रस्ताव पर सम्मत हुए। एटकिन्स ने अगुआ होकर कहा कि "हम लोग अपने पुत्रकलत्र को इतना प्यार करते हैं कि उन्हें छोड़ हम लोग राजपद पाना भी सुखकर नहीं समझते।" स्त्रियों को विवाह का अर्थ अच्छी तरह समझा देने पर वे भी सन्तुष्ट हुई।

दूसरे दिन ब्याह की तैयारी हुई । किन्तु पुरोहित ने एक उज्र पेश किया कि स्त्रियों को धर्म-दीक्षित किये बिना ब्याह कैसे होगा? मैंने उन सब को पुरोहित के उज्र की बात समझा दी । सभी ने स्वीकार किया कि उन लोगों ने अपनी स्त्रियों को कभी कुछ धर्मशिक्षा नहीं दी है । वे लोग स्वयं धर्मज्ञान से वश्चित थे तो दूसरे को क्या उपदेश देते? कभी कभी ईश्वर के नाम से जो उन लोगों को सौगन्द खाने की बुरी आदत थी, इसीसे वे लोग इतना जानते थे कि ईश्वर कोई होगा । किन्तु उनका नाम केवल शपथ के लिए ही वे