पृष्ठ:राबिन्सन-क्रूसो.djvu/३५४

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मदागास्कर टापू में हत्याकाण्ड । ३२8 किन्तु नाव किनारे भिड़ते न भिड़ते हमारे साथी लोग । नाव पर चढ़ने के लिए पानी में धंस पड़े। उनके पीछे पीछे तोन चार से आदर्श दौड़े चले आ रहे थे । हम लोगों के शादमी गिनती में कुल नौ थे, जिनके साथ सिर्फ़ पाँच बन्दक थीं। हम ल।ग बड़े कष्ट से सात मनुष्यों को नाव पर चढ़ा सके । उनमें तीन व्यक्ति बहुत घायल थे । किन्तु नाव पर आजाने पर भो छुटकारा नहीं हुआ। वहाँ के निवासी लग धाधुन्ध बाण बरसा रहे थे । दैवयोग से नाव में कई तख्ते और बेचे थीं । उन्हीं को खड़ा कर कर के हम लोग उनकी आड़ में छिप रहे । द्वीपनिवासियों का जैसा अचूक बाण चलता है। था उससे यदि दिन का समय होता तो हम लोगों के शरीर का कोई अंश सामने पड़ जाने पर फिर उनके हाथ से बचना मुश्किल था। हम लोगों के भाग्य से उस समय रात थी। चाँदनी रात में तख्त के छिद्र से देखा कि वे लोग किनारे खड़े होकर हम लोगों पर बाण बरसा रहे हैं। हम लोगों ने बन्दूकें भर कर एक साथ गोली चलाई । उन लोगों की चिलाहट से मालूम हुआ कि कई आदमी घायल हुए हैं । किन्तु वे लोग बन्दूक की विशेष परवा न करके सबके सब पाँत बाँध कर प्रभात की अपेक्षा से खड़े रहे । कारण यह कि दिन के उजे ले में वे लोग अच्छी तरह लक्ष्य करके हम लेागों पर बाण चलायेंगे। हम लोग उनके डर से बड़े दुखी हुए । न हम लोग लहूर उठा सकते थे, न पाल तान सकते थे और न लगने से नाव ही खे सकते थे । ये सब काम करने के लिए खड़ा होना पड़ेगा, और वे लोग जिसे खड़ा देखेंगे उसे बाद मार गिरावेंगे। अब हम लोगों ने अपने जहाज़ वाले साथियों के विपत्ति