पृष्ठ:राबिन्सन-क्रूसो.djvu/३६

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क्रूसो का भागना ।

बन्दूक की आवाज़ होते ही समुद्र के तट पर और ऊपर स्थल भाग में ऐसा भयानक चीत्कार, हुंकार और कोलाहल होने लगा जिससे स्पष्ट मालूम हुआ कि उन जन्तुओं ने कभी बन्दूक की आवाज़ न सुनी थी । उनका भीषण नाद सुनकर मेरे मन में बड़ी चिन्ता हुई । अब कैसे किनारे उतरूँगा ? बाघ, सिंह आदि हिंस्त्र पशु या तत्तुल्य असभ्य मनुष्य इन दोनों में जिस किसी के पंजे में पड़ेंगे, फल हम लोगों के लिए एक सा ही होगा ।

जो हो, हम लोगों को पानी के लिए स्थल पर कहीं न कहीं उतरना ही होगा । क्योंकि हमारे पास कण्ठ भिगोने को भी थोड़ा सा जल न बच रहा था । इकजूरी ने कहा-—यदि तुम मुझको किनारे उतार दो तो मैं पीने का पानी खोज कर ला सकता हूँ । मैंने कहा--तुम क्यों जाओगे ? क्या मैं जाने लायक़ नहीं हूँ ?

इकजूरी–“नहीं, नहीं, तुम मत जाओ; यदि कोई हिंस्त्र जंगली जानवर आवेगा तो मुझी को खायगा, तुम तो भाग कर प्राण बचा सकोगे ।" उसने इस बात को ऐसे कोमल स्वर में कहा कि मैं मुग्ध होगया । मैंने कहा-- "अच्छा, तो हम तुम दोनों साथ साथ चलेंगे । यदि हिंस्त्र जन्तु हम लोगों को खाने दौड़ेगा तो उसे मार डालेंगे ।" निदान हम लोग जहाँ कत संभव था, नाव को किनारे की . ओर ले गये और दो घड़े तथा बन्दूक लेकर कुछ दूर तक पानी में उतर कर सूखी जमीन पर आये ।

नाव छोड़ कर मैं बहुत दूर तक जाने का साहस न कर सका । क्या जानें, जगली लोग यदि जलपथ से आकर