पृष्ठ:राबिन्सन-क्रूसो.djvu/३६०

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मदागास्कर टापू में हत्याकाण्ड ।' ३३५ फिर जलते हुए घर के भीतर ही घुसने लगेलोग उन । वे नरपिशाचों के तेज़ बरछे की चोट की अपेक्षा धधकती हुई आग का आलिहून अच्छा समझते थे । जहाज़ के माँझी लोग घर के द्वार पर खड़े हो, प्राणभय से भीत, नरनारियां को बरछे की नोक से बींध कर जलते हुए घर के भोतर लौटा देते थे। जो नहीं लौटते थे उन्हें तलवार से टुकड़े टुकड़े कर के आग में फेंक देते थे। किसीके आहूप्रत्य में बरछी भौंक कर बड़ी निर्दयता के साथ मरते थे। जहाँ बहुत लोगों को एक स्थान में जमा देखते थे वहाँ बम का गोला फेंक कर सभीको चौपट कर अपनी शैतानी का अन्त कर दिखलाते थे । माँझिय ने अब तक एक भी बन्दूक की आवाज न की थी, कारण यह कि बन्दूक का शब्द चुन कर बहुत लोग जाग उठते । किन्तु थोड़ी ही देर में चारों ओर आग फैल गई । तब सभी जाग गये । फूस का घर झटपट जल कर भस्म होने लगा । आग के दाह से नाविकों को मार्ग में खड़ा हेना कठिन हो गया । तब वे भी आग के साथ साथ आगे बढ़ने लगे। वे नाविक रास्ते में जिसको पाते उसको आग में ढकेल देते थे या उसे तलवार से टुकड़े टुकड़े कर डालते थे । अब वे लोग धड़ाधड़ बन्दूकें भी चलाने लगे। । मैं नाव पर से यह भीषण अग्निप्रसार देख कर डर गया । जहाज का कप्तान सो गया था । मझियां ने जाकर उसे जगाया । वह आंखें मलता हुआ उठा और उठते ही एकाएक इतनी बड़ी अग्निज्वाला देख कर और बन्दूक की आवाज सुन कर मेरे लिए उद्विग्न हो उठा। यद्यपि उसके पास थोड़े से नाविक रह गये थे तथापि वह तेरह