पृष्ठ:राबिन्सन-क्रूसो.djvu/३६१

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३३६ राबिन्सन क्रसे। नाविकों को साथ ले एक नाव पर सवार हो स्वयं किनारे आ पहुँचा। मेरा भतीजा ( कप्तान ) किनारे आकर और दूसरी नाव पर मुझे देख कर बहुत खुश हुआ, किन्तु और लोगों के लिए उसको कम उत्कण्ठा न हुई । तब भी आग वैसे ही धधक रही थी और शोरगुल भी उसी तरह हो रहा था। ऐसी अवस्था में कुतूहलाक्रान्त चित्त को रोक चुप साध कर बैठ रहना एक प्रकार से असंभव था। भतीजे ने कहा ‘जो भाग्य में बदा होगा से होगा, एक बार वहाँ जाकर देचूँ तो क्या हाल है”। मैं उसे समझाने लगा कि ‘ऐसा मत करोक्योंकि जहाज का भलाबुरा तुम्हारे ही ऊपर निर्भर है । इसलिए उस भयडूर स्थान में तुम्हारा जाना उचित नहीं, बल्कि कहो तो दो आदमी साथ लेकर मैं जाता हूं और देख आता हूं कि क्या मामला है ।' मेरा सब समझाना वृथा हुआ। कितना ही मना किया पर उसने न माना । वह चेला ही गया । मैं करता ही क्या है मैं अब हाथ पाँव मोड़ कर चुपचाप बैठा न रह सका। मैं भी उसके साथ साथ चला। जहाज के पंपैंसठ नाविकों में दो व्यक्ति मारे गयेऔर कुछ पहले ही शहर देखने जा चुके थे, कुछ मेरे साथ चले। सिर्फ सोलह आदमी जहाज पर रह गये। हम लोग इतनी तेजी से दौड़ चले कि धरती पर प्रायः पर न लगते थे। आग को लक्ष्य कर हम लोग उसी तरफ़ दौड़ चले । उस समय रास्ते का खयाल किसीको थोड़े ही था । समीप जाकर कासर नरनारियों का आर्तनाद सुन कर हम लोगों का हृदय काँप उठा । इतिहास में कितने ही नगरों