पृष्ठ:राबिन्सन-क्रूसो.djvu/३७९

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राबिन्सन क्रूसो।

जहाज़ के गोलन्दाज़ ने टूटे फूटे लोहे के काँटों और छड़ों से और जो कुछ कठिन पदार्थ हाथ में आ गये उनसे दो तोपें भर रक्खीं। हमारा जहाज़ अनुकूल वायु पाकर सुदूर समुद्र में ठिकाने के साथ चला जा रहा था। किन्तु कई नावे पाल तान कर तीर को तरह तीव्रगति से पीछे आ रही थीं। दो नावें बड़े वेग से हमारी ओर भारही थीं। वे दोनों कुछ देर में ज़रूर ही हमारे जहाज के पास पहुँच जायँगी-यह जान कर हम लोगों ने तोप की एक ख़ाली आवाज़ की। किन्तु वे इसको कुछ परवा न कर के अग्रसर होने लगीं। तब हम लोगों ने श्वेत-पताका उड़ा कर सन्धि का संकेत किया। पर वे उसे भी अग्राह्य कर के समीप आ गई। तब हम लोगों ने सफ़ेद झण्डी हटा कर विरोध-सूचक लाल-पताका उड़ाई और भेरी बजा कर उन्हें दूर रहने को कहा। किन्तु इस पर भी उन्होंने कुछ ध्यान न दिया। वे लोग और भी तेजी से आगे की ओर बढ़ने लगे। तब जहाज को उनके सामने तिर्यक खड़ा कर के एक ही बार पाँच तोपें छोड़ी। गोले की चोट से एक नाव का पिछला हिस्सा एकदम उड़ गया। नाव के सवार झटपट पाल गिरा कर नाव के पिछले भाग की ओर इसलिए एकत्र हो गये कि नाव कहीं डूब न जाय। अब हम लोग उस नाव के आक्रमण से निश्चिन्त हुए। पीछे की नाव अग्रसर होकर टूटी हुई नाव के सवारों को लेने लगी और पहली नाव एकाएक हमारे जहाज़ के पास आ पहुँची। हम लोगों ने उन्हें फिर समझाने की चेष्टा की। पर वे लोग हमारी बात को अनसुनी कर के हमारे जहाज पर चढ़ने की चेष्टा करने लगे।