पृष्ठ:राबिन्सन-क्रूसो.djvu/३७९

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है - ३५४ राबिन्सन क्रस । जहाज के गोलन्दाज ने टूटे फूटे लोहे के काँटों और छड़ों से और जो कुछ कठिन पदार्थ हाथ में आ गये उनसे दो तोपें भर रक्खीं। हमारा जहाज अनुकूल वायु पाकर सुदूर समुद्र मे ठिकाने के साथ चला जा रहा था । किन्तु कई नावें पाल तान कर तीर को तरह तीव्रगति से पीछे आ रही थीं । दो नावें बड़े वेग से हमारी ओर आरही थीं। वे दोनों कुछ देर में जरूर ही हमारे जहाज के पास पहुँच जाएँगी —यह जान कर हम लोगों ने तोप की एक खली आवाज की । किन्तु वे इसको कुछ परवा न कर के अग्रसर होने लगीं। तब हम लोगों ने श्वेतपताका उड़ा कर सन्धि का संकेत किया । पर वे उसे भी आग्राह्म कर के समीप आ गईं। तब हम लोगों ने सफेद झण्डी हटा कर विरोधसूचक लालपताका उड़ाई और भेरी बजा कर उन्हें दूर रहने को कहा । किन्तु इस पर भी उन्होंने कुछ ध्यान न दिया । वे लोग और भी तेजी से आगे की ओर बढ़ने लगे । तब जहाज को उनके सामने तिथ्य खड़ा कर के एक ही बार पाँच तोपें छोड़ीं। गोले की चोट से एक नाव का पिछला हिस्सा एकदम उड़ गया । नाव के सवार झटपट पाल गिरा कर नाव के पिछले भाग की ओर इसलिए एकत्र हो गये कि नाव कहीं डूब न जाय । अब हम लोग उस नाव के आक्रमण से निश्चिन्त हुए। पीछे की नाव अग्रसर होकर टूटी हुई नाव के सवारों को लेने लगी और पहली नाव एकाएक हमारे जहाज के पास आ पहुंची। हम लोगों ने उन्हें फिर समझाने की चेष्टा की । पर वे लोग हमारी बात को अनसुनी कर के हमारे जहाज पर चढ़ने की चेष्टा करने लगे ।