पृष्ठ:राबिन्सन-क्रूसो.djvu/३७८

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३५३ चोरी के जहाज पर क्रूसे। मित्र ! मैं तुम्हारे इस उपकार का बदला कैसे चुकाऊँगा १। उसने कहा-मैं नाविक हूं और एक पोर्टेगीज मेरा सद्भी है हमारा आठ नौ महीने का वेतन बाक़ी है । यदि आप वह दे दे तो हम आप ही के यहाँ रह जायें । इसके बाद जो आपके धर्म में आवेहमें दीजिएगा । मैं इस शर्त पर राज़ी होकर उन्हें साथ ले जहाज़ पर सवार हुआ । जहाज़ पर पाँव रखते ही मेरा साथी अँगरेज़ खुशी से चिल्ला कर बोला—वाहवाह, छेद तो बन्द हो गया। बिलकुल बन्द हो गय। में—सच कहो, धन्य परमेश्वर ! तो t अब देर करने की क्या ज़रूरत १ अभी लंगर उठाओ । शरीक लंगर उठावें ! यह क्यों ? मैं इस प्रश्न का उत्तर पीछे गा । अभी एक मिनट भी विलम्ब करने का समय नहीं है। सभी लोग मिल कर .) जहाज़ को शीघ्र यहाँ से ले चलो। सभी लोगों ने बड़े अचम्भे में आकर तुरन्त जहाज़ खोल दिया । मैं अपने साथी अँगरेज़ को कमरे में बुला कर यह सब त्रुत्तान्त कही रहा था कि इतने में एक नाविक ने आकर ख़बर दी—हम लोगों को पकड़ने के लिए पाँच जहाज बड़ी तेज़ी से दौड़े आ रहे हैं । मैंने सब नाविकों से कह दिया कि वे लोग हमें लुटेरे (जलदस्यु) समझ कर पकड़ने आ रहे हैं । यदि तुम लोग हमारी सहायता करने को प्रस्तुत हो तो मैं उन लोगों से . एक बार भिड़ ज़ोऊँ । मेरी राय मान कर सभी ने मेरी आाशा का पालन करना स्वीकार किया । २३