पृष्ठ:राबिन्सन-क्रूसो.djvu/३८१

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है । ३५६ रबिन्सन झूले। निश्चय किया। वहाँ जैसे होगा, जहाज़ बेच डालेंगे । इस पाप से किसी तरह पिण्ड छुड़ा कर हम लोग किसी दूसरे जहाज़ पर सवार होकर घर को लौट जागे । हम लोग चीन ही की ओर चले किन्तु सीधे मार्ग से नहीं । रास्ते से हट कर चलना ही उचित समझा । कौन जाने, यदि किसी जहाज़ के सामने पड़ जाचें, जो हमारे हालात से वाकिफ़ हो तो फिर विपत्ति में फंसना होगा। । इस समय की अवस्था मुझे बहुत बुरी लगती थी इतने दिनों तक अनेक प्रकार की विपत्ति में पड़ चुका । परन्तु एसा आयात में न था । क्या इस बुढ़ापे कभी पड़ा में विधाता ने चोरीडकैती का अपवाद भी मेरे कपार में लिखा था ? यदि इस जीवन में कभी किसी का कुछ अनिष्ट भी किया होगा तो वह अपना ही । मैं आप ही अपना शत्र हैं। इसके अतिरिक्त आज तक मैंने कभी किसी के साथ कोई ठगाई का काम नहीं किया है । मैं ऐसी अवस्था में पड़ गया हूं कि अपनी निदेषता को सप्रमाण सिद्ध करना कठिन हो पड़ा है। मेरे पास प्रमाण ही क्या है ? बिना कुछ सबूत दिखलाये मेरी बात का विश्वास ही कौन करेगा ? इसलिए प्रतिपक्षियों से प कर भागने के लिए मेरा मन व्याकुल हो उठा था। किन्तु किस तरफ भागने से बच सकेंग इसका कुछ निश्चय नहीं कर सकता था । अन्त में चीन के टंकुइनउपसागर ( खाड़ी ) के मैकाय बन्द्र में जहाज़ ले जाने की बात तय हुई। समुद्र के मध्यवर्ती होकर जाने में खटक, था इस लिए - हम लोग जहाज़ को एक नदी के मुहाने में ले गये मैं भाग्य से