पृष्ठ:राबिन्सन-क्रूसो.djvu/३८१

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राबिन्सन क्रूसो।


निश्चय किया। वहाँ जैसे होगा, जहाज़ बेच डालेंगे। इस पाप से किसी तरह पिण्ड छुड़ा कर हम लोग किसी दूसरे जहाज़ पर सवार होकर घर को लौट जायँगे।

हम लोग चीन ही की ओर चले किन्तु सीधे मार्ग से नहीं। रास्ते से हट कर चलना ही उचित समझा। कौन जाने, यदि किसी जहाज़ के सामने पड़ जायँ, जो हमारे हालात से वाकिफ़ हो तो फिर विपत्ति में फँसना होगा।

इस समय की अवस्था मुझे बहुत बुरी लगती थी। इतने दिनों तक अनेक प्रकार की विपत्तियों में पड़ चुका हूँ परन्तु ऐसी आफ़त में कभी न पड़ा था। क्या इस बुढ़ापे में विधाता ने चोरी-डकैती का अपवाद भी मेरे कपार में लिखा था? यदि इस जीवन में कभी किसी का कुछ अनिष्ट भी किया होगा तो वह अपना ही। मैं आप ही अपना शत्र हूँ। इसके अतिरिक्त आज तक मैंने कभी किसी के साथ कोई ठगाई का काम नहीं किया है। मैं ऐसी अवस्था में पड़ गया हूँ कि अपनी निर्दोषता को सप्रमाण सिद्ध करना कठिन हो पड़ा है। मेरे पास प्रमाण ही क्या है? बिना कुछ सबूत दिखलाये मेरी बात का विश्वास ही कौन करेगा? इसलिए प्रतिपक्षियों से छिप कर भागने के लिए मेरा मन व्याकुल हो उठा था। किन्तु किस तरफ़ भागने से बच सकूँगा इसका कुछ निश्चय नहीं कर सकता था। अन्त में चीन के टंकुइन-उपसागर (खाड़ी) के मैकाओ बन्दर में जहाज़ ले जाने की बात तय हुई।

समुद्र के मध्यवर्ती होकर जाने में खटका था इस लिए हम लोग जहाज़ को एक नदी के मुहाने में ले गये। भाग्य से