पृष्ठ:राबिन्सन-क्रूसो.djvu/३८२

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क्रसे का भागना । ३५७ ही यह बात सूझी थी । हम लोगों के टंकुइनउपसागर में प्रवेश करने के बाद तुरन्त दो ओलन्दाज़ ( पोर्टेगीज ) जहाज़ " वहाँ आ पहुंचे । जहाँ मैं रहूँ वहाँ शान्ति की संभावना कहाँ ? हम लोगों के पीछे तो शत्रु थे ही, पर भाग्यदोष से हम लोगों के सम्मुख से भी मित्र न मिले । जोनवाले हम लोगों को देख कर जो भाव प्रकाश करने लगे उससे किसी को सन्देह न रहा कि ये लोग हम लोगों के साथ अच्छा बर्ताव करेंगे । हमारे जहाज़ को किनारे पर देख कुंड के झुंड चीनी लोग टिड्डीदल की भाँति नदी के किनारे एकत्र होने लगे । हम लोगों ने जब जहाज के किनारे लगा कर उस पर से चीज वस्तुओं को उतार कर जहाज को मरम्मत के लिए उलट दिया तब चीनी लोगों ने समझा कि इन का जहाज किनारे लग कर उलट गया है। इससे वे लोग हम सबको दासरूप में बन्द करने और हम लोगों का मालअसबाब लूटने के लिए आतुर हो उठे । हमारे नाविक जब जहाज की मरम्मत कर रहे थे तब चोनो लोग नाव पर सवार हो हम लोगों के घेरने लगे। उन का ड्राशय समझ कर हम अपनी तरफ़ के लोगों को जहाज से बन्दूक और गोलीबारूद देने लगे। चीनियों ने समझा कि हम लोग टूटे जहाज पर से माल उतार रहे हैं । वे लोग निःशक भाव से झट आकर हमारे नाविकों के पकड़ने की चेष्टा करने लगे । हम लोगों का जहाज एक तरफ़ किनारे लगा था। सभी लोग एक तरह से असाव धान थे । यह समय युद्ध करने के लिए उपयुक्त न था । हम लोगों ने ‘झटपट मालअसबाब को सहेज कर अपने जहाज के किनारे से हटा कर पानी में ले जाना चाहा । चीनी हैं