पृष्ठ:राबिन्सन-क्रूसो.djvu/३८७

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३६२ राबिन्सन क्रा। सुमात्रा द्वीप के निकट एक दुर्घटना हो गई है। जहाज का कप्तान जब मलय देशवासियों के हाथ से मारा गया तब जहाज़ के नाविकगण जहाज चुरा कर ले गये। फिर उन नाविकों ने लुटेरों के हाथ बह जहाज बेच डाला। चूह लुटेरा जहाज़ स्यामउपसागर में पोर्टेगीज ओलन्दाज) और अँग रेजी जहाज के हाथ पकड़ा ही जाने को था पर जरा सा अवकाश मिल जाने से वह भाग गया। उस लुटेरे जहाज की बात सभी जहाजी सुन चुके हैं । देखते ही उसे पहचान लेंगे। अब जहाँ उसे एक बार पकड़ पायेंगे तहाँ फिर उसे कुछ कहने का भी मौका न देंगे। गिरक्लार होते ही उन नाविकों को मस्तूल की रस्सी से लटका देंगे । हाय हाय ! हे भगवान् ! यह हमारी ही कोर्ति कहानी है और प्राण जुड़ाने वाले भष्थि चित्र का निदन है। वह बूढ़ा पथप्रदर्शक इस समय सम्पूर्ण रूप से हमारी आज्ञा के आधीन है । इसका उतना भय नहीं । यह सोच कर मैंने उससे खुलासा कहा-‘महाशयइसी कारण हम लोग उद्विग्न होकर उत्तर ओर दौड़े जा रहे हैं। वे भागने वाले हमी लोग हैं । लुटेरे न होने पर भी हम उस कलहू से कलकिंत हैं।' इसके बाद मैंने अपने जहाज़ का समस्त इतिहास उससे कह चुनाया । चुन कर वृद्ध बेचारा अवाक् हो रहा। उसने हम लोगो से कहाआप लोगों ने बहुत दूर उत्तर आर आकर सचमुच ही बहुत बुद्धिमानी का काम किया है। मैं आपके इस जहाज़ को बेच कर एक दूसरा जहाज़ ख़रीद हूँगा । उससे आप लोग निनि बंगाल को लौट जा सकेंगे। मैंने कहा महाशय ! जहाज़ तो आप बेब देंगे, किन्तु

  • जो भलेमानस इस जहाज़ को खरीदेंगे उनके साथ. तो यह