पृष्ठ:राबिन्सन-क्रूसो.djvu/३९

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राबिन्सन क्रूसो ।


लोगों ने दिन भर परिश्रम करके सिंह का चमड़ा उतार लिया और उसे नाव की छपरी पर सूखने को फैला दिया । वह दो दिन की धूप लगने से अच्छी तरह सूख गया । फिर हम उस पर सोने लगे ।

इसके अनन्तर लगातार दस बारह दिन तक हम दक्षिण दिशा की ओर चले; पानी की आवश्यकता न होने पर हम किनारे की भूमि पर न उतरते थे । हम लोगों की खाद्य सामग्री समाप्त हो चली, इसलिए हम बहुत थोड़ा थोड़ा खाने लगे ।

हम इस ताक में थे कि गैम्बिया या सेनिगल नदी के निकट जा पहुँचेंगे तो वहाँ गिनी, और ब्रेज़िल प्रभृति देश का वाणिज्य व्यवसायी कोई न कोई यूरोपीय जहाज़ मिल ही जायगा । यदि जहाज़ न मिलेगा तो हबशियों के हाथ में पड़कर मर मिटेंगे ।

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क्रूसो का विपद से छुटकारा ।

जय नहीं तो क्षय होगा ही, यह संकल्प करके हम दस दिन और चले; तब मनुष्यों की बस्ती का कुछ कुछ चिह्न दिखाई देने लगा । हमने नाव पर जाते समय दो तीन जगह देखा कि काले काले नंगे लोग कछार में खड़े होकर हम लोगों की ओर देख रहे हैं । उन लोगों को देख कर हम उनके पास जाना चाहते थे किन्तु इकजूरी ने हमें रोका । तब हम नाव को किनारे किनारे ले चले । यह देख कर वे लोग भी नाव के साथ साथ दौड़ चले । हमने गौर करके देखा, उन लोगों में