पृष्ठ:राबिन्सन-क्रूसो.djvu/४०१

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राबिन्सन क्रुसो।

३७४ राबिन्सन क्रसे। . तरह हाथ में खढ लिये खड़े थे । कई एक बकरे और अन्य - चौपाये पड़े थे जिनका सिर काट लिया गया था। येचारे निष पशुओं को पकड़ पकड़ कर जूजू देवता के आगे बलिदान दिया गया है । ईश्वर की दृष्टि में जितने प्राणी हैं उन सब में श्रट मनुष्य ही है । ईश्वर ने उसको ज्ञान दिया है। उस ज्ञान का ऐसा कुव्यवहार देख कर मुझे अत्यन्त खेद हुआ । अपने हाथ के बनाये एक अद्भुत आकार के पदार्थ को देवता समझ कर पूजना कैसी मूर्खता है ? इस बात को सेचते सत्र ते मुझे अत्यन्त क्रोध हुआ । मैंने तलवार से उस मूर्ति के सिर पर की टोपी काट डालीऔर मेरे साथी ने उसके बदन पर से चमड़े की ओढ़नी खींचली। जिन लोगों का वह देता था वे लोग शोरोगुल मचा कर रोने लगे । बड़ा हल्ला हुआ। देखते ही देखते तीन चार सौ आदमी धनुषबाण लेकर वहाँ आ गये । लक्षण ठीक न देख कर हम लोग वहाँ से खिसक गये । इस गाँव से चार मील पर हम लोगों के साथी बणिक् डेरा डाले थे। तीन दिन वहाँ रह कर हम लोगों को कुछ बेड़े खरीदने थे । क्योंकि हम लोगों के अनेक घोड़े मार्गश्रम से बेकाम हो गये थे । समय का यह सुयोग पाकर हम तोनों ने सलाह की कि इस विचित्र देवता को किसी तरह उस करना चाहिए । एक काठ के कुन्दे को परमेश्वर मान कर पूजा करना परमेश्वर का अपमान करना है । हम लोग तातारी का छद्वेष धारण कर रात होने पर चुपचाप मूर्तिविपंस करने चले । ग्यारह बजे रात को है ।