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राबिन्सन क्रूसो।

सारी रात जागते रह कर हम लोग प्रातःकाल की प्रतीक्षा करते रहे । सुबह होते होते देखा कि शत्रुओं की संख्या बहुत बढ़ गई है । किनारे आकर जहाज़ उलटना चाहता है ! सब जगह से बच कर अन्त में यह क्या आफत आई !

हम लोग दिन भर चुपचाप बैठे रहे । डाकुओं ने हमारे साथ कोई छेड़छाड़ न की । हम लोगों ने भो उनसे कुछ न कहा। साँझ होने पर हम लोगों ने भागने का विचार करके उन्हें धोखा देने के लिए खूब आग प्रज्वलित की और ऐसा प्रबन्ध किया जिसमें सारी रात आग धधकती रहे। इसके बाद हम लोग अँधेरी रात में घोड़ों और ऊंटों को साथ ले जंगल के भीतर ही भीतर चुपचाप भाग चले । आग को धधकते देख लुटेरे निश्चिन्त बैठे थे । उन्हें यह धारणा थी कि हम लोग वहीं उनके हाथ से मरने के लिए बैठे हैं ।

हम लोग एक वर्ष पाँच महीने चल कर अन्त में, सब विघ्न बाधाओं से बचकर, समुद्र के तट पर पहुंच गये । रूसी सजन ' जो मेरे साथ आये थे वे, यहाँ से जर्मनी चले गये ।

१७०५ ईसवी के जनवरी महीने की १० वीं तारीख को लगभग ३५ हज़ार रुपया ले कर दस वर्ष नौ महीने के अनन्तर मैं अपने देश इँगलैन्ड को लौट आया । में अब बहत्तर साल का हुआ। इतने बड़े जीवन में देशाटन के अनेक उपद्रवो को झेल कर अब मे परलाक की दीर्घयात्रा के लिए शान्तिमय के पथ का पथिक होने की प्रतीक्षा कर रहा हूँ ।

ईश्वर ने जल-थल में जैसे राबिन्सन क्रूसो की रक्षा की वैसे ही सबकी रक्षा करें। शान्ति: ! शान्तिः !! शान्तिः !!!