पृष्ठ:राबिन्सन-क्रूसो.djvu/८१

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राबिन्सन क्रूसो ।

ई६८ राबिन्सन क्रसो । अच्छा बुरा मैं अपने साथियेां से , दुनियाँ से जुदा मैं इस अलग हो गया, इसीसे अब हो गया। संसारी लोगों से तक बचा हूं। जिन्होंने मेरे अब भेट होने की संभावना प्राण बचाये हैं, वही किसी नहीं। दिन मेरे उद्धार का भी उपाय कर देंगे । मैं मरुभूमि के आन्नजलकी मेरे पास खानेपीने हीन देश में नहीं आ पड़ा हूँ । पहनने सामग्री और ओढ़ने यहाँ खाद्य-सामग्री मिलती | के लिए कड़े कम हैं। है। यह उष्णधान देश है । ज़्यादा कपड़ों की भी आवश्य- कता न होगी । यहाँ मुझे दुश्मनों का भी | मेरे प्राणधारण का कोई कोई डर नहीं । यदि मैं अवलम्ब नहीं । पास में ऐसा आमिका के उपकूल में पहुँच एक भी आदमी नहीं जो जाता तो अवश्य प्राणों का मुझ को धैर्य दे सके या भय था। ईश्वर ने विशेषकर | जिसके साथ दो बातें कह मुझे काम में लगा रखा | कर में अपने जी का बोझ है और जहाज़ को स्थल हलका कर स। भाग के समीप लाकर मेरे जीवन के लिए सभी आवश्यक वस्तुएँ दे दी हैं। मतलब यह कि मेरी अवस्था संसार में विशेष शोचनीय होने पर भी ऐसा कुछ येाग था जिसके द्वारा मुझे कुछ सान्त्वना मिलती थी । जब मैं अपने भलेबुरे की तुलना