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पृष्ठ:समाजवाद और राष्ट्रीय क्रान्ति.pdf/२४२

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आगे बढ़ना [४] विद्यार्थियों से (१६४६) [सन् १६४२ की क्रान्ति के पश्चात् इस देश में विद्यार्थी- अान्दोलन का पुनर्जन्म पुनर्गटन हुअा है वह एक बड़ी ही अाशाप्रद चीज है। प्राचार्य नरेन्द्र देव फरवरी १६४६ के प्रथम सताह में देहरादून में हुए संयुक्त प्रान्तीय विद्यार्थी कांग्रेस के सम्मेलन के सभापति निर्वाचित किए गए थे। अस्वस्थता के कारण वे वहां जा तो न सके, परन्तु उन्होंने वहां एकत्रित सहस्रों विद्यार्थियों को निम्न सन्देश भेजा, जिसमें उन्होंने विद्यार्थियों और युवकों के अान्दोलन किस प्रकार चलाए जाने चाहिए, इस विषय पर अपने विचार व्यक्त किए हैं-सम्पादक] एक शक्तिशाली युवक-अान्दोलन, निश्चय ही राजनैतिक और सामाजिक अवस्थानों की डाँवा डोंल स्थिति का परिचायक है। उससे पता लगता है कि भविष्य के तकाजे भूतकाल की परम्पराओं स मेल नहीं खाते और प्रक नवीन संतुलन की नितान्त आवश्यकता है। प्रत्येक देश में युवक-अान्दोलन का स्वरूप वहाँ की सामाजिक अवस्थाये निर्धारित करती हैं । प्रथम विश्वयुद्ध के पश्चात् यूरोप २१५