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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 19.pdf/२५२

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२२४ सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय २५. यो नियम ३१ दिसम्बर, १९२१ तक एक सालके लिए लागू रहेंगे किन्तु इनमें इससे पहले समय समयपर नई प्रान्तीय कांग्रेस कमेटी सुधार, परिवर्तन और संशोधन कर सकती है ।

प्रान्तीय कांग्रेस कमेटियोंके कार्यकी सुविधा के लिए मैंने ऊपर दिये गये नियम बनानेकी धृष्टता की है । कमेटियाँ स्वभावतः इनमें जैसा चाहें फेरफार कर सकती हैं या इन्हें बिलकुल नामंजूर कर सकती हैं। ये नियम केवल मार्गदर्शनकी दृष्टिसे सामने रखे गये हैं। अगर जूनकी समाप्तिसे पहले इस नये तन्त्रको चालू करना है, जैसा कि नये संविधान के अन्तर्गत अनिवार्य है, तो हमें देर नहीं करनी चाहिए। यदि हम नये संगठनको व्यवस्थित और सुचारू रूप प्रदान कर सकें और लाखों स्त्री-पुरुषोंको सक्रिय कार्यकर्ता, असहयोग के प्रस्तावको कार्यान्वित करनेके लिए कृतसंकल्प कार्यकर्ता बना सकें तो यह बात आसानीसे समझी जा सकती है कि हम अवश्य ही एक वर्ष में शान्तिपूर्ण और रक्तहीन क्रान्ति कर सकेंगे। असहयोगकी समस्त योजना इस मान्यतापर आधारित है कि इस देशपर अंग्रेजोंका नियन्त्रण लोगोंके ऐच्छिक सहयोगपर निर्भर है । यह सच है कि लोग यह सहयोग अनजाने ही देते हैं; और यह भी बिलकुल सच है कि इसका कारण भय है; और इसका कारण वे प्रलोभन हैं, जिन्हें देकर अंग्रेज हममें से कुछ लोगोंको लुब्ध करते आये हैं । इस दृष्टिसे वर्तमान आन्दोलन यह दिखानेका एक प्रयत्न-भर है कि हम जिस क्षण अंग्रेजोंको अपना यह ऐच्छिक सहयोग देना बन्द कर दगे, जिस क्षण हम उनका भय त्याग देंगे और उनके प्रलोभनमें आनेसे इनकार कर देंगे उसी क्षण हम लोग स्वतन्त्र हो जायेंगे। मैं मानता हूँ कि हममें से बहुत लोग इस कार्यको जितना कठिन मानते हैं, यह उतना कठिन नहीं है। इस चालू वर्ष में यह मालूम हो जायेगा कि मेरा यह विश्वास सही है या नहीं। कांग्रेसके पण्डाल में जो हजारों लोग इकट्ठे हुए थे, उनका विश्वास भी वही था जो मेरा है । अब अपने इस विश्वासको कार्यरूप देना उनका काम है । [ अंग्रेजीसे ] यंग इंडिया, १२-१-१९२१ १. दिसम्बर १९२० में नागपुर में हुए कांग्रेस अधिवेशनमें । Gandhi Heritage Portal